best news portal development company in india

ईरान समझौते पर घिरे ट्रंप, अपनी ही पार्टी के नेताओं ने उठाए सवाल

SHARE:

ईरान समझौते पर घिरे ट्रंप, अपनी ही पार्टी के नेताओं ने उठाए सवाल

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। ईरान के साथ हुए नए समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी डेमोक्रेट्स के बाद अब रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और ट्रंप प्रशासन के पूर्व अधिकारियों ने भी समझौते पर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आलोचकों का आरोप है कि तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की जल्दबाजी में ट्रंप प्रशासन ने ईरान को ऐसी रियायतें दे दी हैं, जिनसे उसे आर्थिक और राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इस समझौते को “तुष्टिकरण की नीति” बताया, जबकि रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी ने इसे दशकों की सबसे बड़ी विदेश नीति की भूल करार दिया। उनका कहना है कि इस समझौते से ईरान मजबूत हुआ है और अमेरिका की स्थिति कमजोर हुई है।

ट्रंप प्रशासन में ऊर्जा मंत्री रहे डैन ब्रुइलेट ने चेतावनी दी कि प्रतिबंधों में ढील मिलने से ईरान को तेल और गैस निर्यात से सालाना करीब 60 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि यह धन क्षेत्रीय गतिविधियों और अमेरिका-विरोधी संगठनों तक पहुंच सकता है।

सबसे तीखी प्रतिक्रिया ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की ओर से आई। उन्होंने समझौते को ईरान के पक्ष में झुका हुआ बताते हुए कहा कि इससे तेहरान को आर्थिक लाभ तो मिला, लेकिन अमेरिका की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं हुआ। बोल्टन ने आरोप लगाया कि ट्रंप की प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा से अधिक पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित करना और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाना था।

बोल्टन ने यह भी कहा कि समझौते में ऐसी कोई ठोस गारंटी नहीं है, जो भविष्य में ईरान द्वारा समुद्री मार्गों या क्षेत्रीय गतिविधियों पर दबाव बनाने की संभावना को रोक सके। उनके मुताबिक समझौते से ईरान को अपेक्षा से अधिक लाभ मिला है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों को रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

Leave a Comment