सट्टा बाजार, लोकल बाजार के हवाले से पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिल सकती है सत्ता…..
नई दिल्ली। पांच राज्यों—असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—में संपन्न विधानसभा चुनाव 2026 के बाद अब सबकी निगाहें एग्जिट पोल के नतीजों पर टिक गई हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर 4 मई को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। चुनाव में इस बार भारी जनभागीदारी देखने को मिली। पश्चिम बंगाल में 92–93 प्रतिशत तक रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, जबकि तमिलनाडु में 82–84 प्रतिशत और पुडुचेरी में 86–89 प्रतिशत मतदान हुआ। केरल और असम में भी पारंपरिक रूप से उच्च मतदान प्रतिशत देखने को मिला, जिससे चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी माने जा रहे हैं।

एग्जिट पोल के रुझानों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में कड़ी टक्कर के बीच भारतीय जनता पार्टी को 146 से 175 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 118 से 140 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि कुछ एजेंसियां टीएमसी की वापसी का दावा भी कर रही हैं, लेकिन अधिकांश सर्वे भाजपा को बढ़त देते दिख रहे हैं।
👉 तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम गठबंधन को 122–145 सीटों के साथ स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जबकि AIADMK गठबंधन 65–110 सीटों तक सिमट सकता है।
👉 वहीं केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं, जहां संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को 70–80 सीटें और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा को 58–68 सीटें मिलने का अनुमान है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यहां सीमित प्रभाव में नजर आ रहा है।
👉 असम में भारतीय जनता पार्टी के 88–100 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत में लौटने के संकेत हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 24–36 सीटों तक सीमित रह सकती है। पुडुचेरी में भी एनडीए के सत्ता बरकरार रखने की संभावना जताई जा रही है।
👉 इधर, सट्टा बाजार और स्थानीय कारोबारी रुझानों में भी दिलचस्प संकेत मिले हैं। खासकर पश्चिम बंगाल में भगवा (गेरुआ) रंग की मांग 90 प्रतिशत तक बताई जा रही है, जबकि हरे रंग की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत रही। इसे राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि ऐसे आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।
कुल मिलाकर, मामूली घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए इन चुनावों को विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की पारंपरिक हिंसक राजनीति के बीच एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर 4 मई को आने वाले नतीजों पर है, जो यह तय करेंगे कि किन राज्यों में सत्ता बदलेगी और कहां सरकार की वापसी होगी।









