बिहार के जमुई से मो० आसिफ अनवर की रिपोर्ट :
“त्याग और दान की जब भी बात आती है, दानवीर भामाशाह का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके इसी आदर्श को जमीन पर उतार रहे हैं जमुई के प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ और समाजसेवी डॉ. नीरज साह। झाझा के सुदूर ग्रामीण इलाकों में सेवा की एक ऐसी अलख जगी है, जिसने मानवता की मिसाल पेश की है।

जमुई जिले के झाझा प्रखंड का सुदूरवर्ती गांव बुंढीखार…
आज यहाँ का नजारा किसी उत्सव से कम नहीं था। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूल-मालाओं के साथ ग्रामीण एक ऐसे शख्स का स्वागत कर रहे थे, जिन्होंने पिछले दो दशकों से सेवा को ही अपना धर्म मान लिया है। मौका था दानवीर भामाशाह की जयंती पखवाड़ा समारोह का, जिसे समाजसेवी डॉ. नीरज साह ने बेहद खास अंदाज में मनाया।
डॉ. नीरज साह ने यहाँ के महादलित टोले में पहुंचकर 200 से अधिक जरूरतमंद महिलाओं के बीच साड़ियों का वितरण किया। साड़ी पाकर महिलाओं के चेहरे खिल उठे। डॉ. नीरज साह का मानना है कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। पिछले 20 वर्षों से वे जमुई के कोने-कोने में कभी प्यासों के लिए चापाकल लगवाते हैं, तो कभी कड़कड़ाती ठंड में गरीबों का सहारा बनकर कंबल बांटते हैं।
मीडिया से बाइट देते हुए डॉ नीरज शाह ने कहा
”दानवीर भामाशाह ने अपनी पूरी संपत्ति राष्ट्र के लिए समर्पित कर दी थी। हम उनके पदचिह्नों पर चलने का एक छोटा सा प्रयास कर रहे हैं। मेरा संकल्प है कि जब तक सांस चलेगी, गरीबों और असहायों की सेवा करता रहूँगा। समाज तभी बदलेगा जब हर सक्षम व्यक्ति जरूरतमंद की मदद के लिए हाथ बढ़ाएगा।”
कार्यक्रम में पंचायत के मुखिया पंकज कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सिर्फ कपड़े ही नहीं, डॉ. नीरज साह शिक्षा की मशाल भी जला रहे हैं। वे लगातार गरीब बच्चों को कॉपी-किताबें बांटकर उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि बच्चों को शिक्षित बनाएं, क्योंकि शिक्षा ही भविष्य का एकमात्र उजाला है।

डॉ. नीरज साह का यह प्रयास समाज के लिए एक बड़ी सीख है। बुंढीखार गांव की महिलाओं के चेहरे की मुस्कान इस बात की गवाह है कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती।








