best news portal development company in india

अवैध इमारत बनी मौत का जाल: लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत, जांच के आदेश, भवन मालिक हिरासत में

SHARE:

अवैध इमारत बनी मौत का जाल: लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत, जांच के आदेश, भवन मालिक हिरासत में

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। उषा मेहता मार्ग स्थित एक तीन मंजिला अवैध व्यावसायिक इमारत में लगी आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में अधिकांश मौतों का कारण दम घुटना बताया जा रहा है। मृतकों में छात्र, प्रशिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

शॉर्ट सर्किट से लगी आग, देखते ही देखते पूरी इमारत बनी आग का गोला

जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब 2 बजे इमारत के भूतल में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। आग तेजी से फैलती हुई बेसमेंट, पहली और दूसरी मंजिल तक पहुंच गई। इमारत के बेसमेंट और भूतल पर पेट्स क्लीनिक और दुकानें संचालित थीं, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर गेमिंग जोन, एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर चल रहे थे।

घटना के समय भवन में बड़ी संख्या में छात्र, कर्मचारी और प्रशिक्षक मौजूद थे। आग लगते ही अफरा-तफरी मच गई और लोग बाहर निकलने के लिए भागने लगे, लेकिन पर्याप्त निकास मार्ग न होने के कारण कई लोग अंदर ही फंस गए।

निकास मार्ग की कमी बनी मौत की वजह

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भवन में केवल एक मुख्य रास्ता था। पहली मंजिल तक सीढ़ियां थीं, जबकि ऊपर जाने के लिए लिफ्ट का इस्तेमाल किया जाता था। आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और लिफ्ट बंद हो गई। इससे दूसरी मंजिल पर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके।

जान बचाने की कोशिश में कई लोग भवन के पिछले हिस्से में बने एक कमरे की ओर भागे, लेकिन घना धुआं और आग की लपटें उनके लिए मौत का कारण बन गईं। अधिकांश शव भवन के पीछे स्थित कमरों से बरामद किए गए। शुरुआती जांच में दम घुटने को मौत की मुख्य वजह माना जा रहा है।

जान बचाने के लिए तारों के सहारे कूदे लोग

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल से बिजली और केबल तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की। इस दौरान कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है।

14 दमकल गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू

आग की भयावहता को देखते हुए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म वाहन सहित 14 दमकल गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। बचाव दल ने प्रभावित इमारत तक पहुंचने के लिए दीवारों में बड़े छेद किए। कुछ लोगों को बगल की इमारत की छत के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला गया।

हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 45 मिनट का समय लग गया, जिससे आग और अधिक फैल गई।

2016 में ही मिला था अवैध निर्माण का नोटिस

इस हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वर्ष 2016 में ही इस भवन को अवैध बताते हुए नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद वर्षों तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

बताया जा रहा है कि भवन में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और न ही इसके पास फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) थी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के अनुसार भवन मूल रूप से आवासीय था, इसलिए फायर एनओसी जारी नहीं की गई थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया घटनास्थल का जायजा

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया और तत्काल लखनऊ पहुंचे। मुख्यमंत्री सीधे घटनास्थल पहुंचे, जहां उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों को घायलों के बेहतर उपचार के निर्देश दिए और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उच्चस्तरीय जांच के आदेश, एसआईटी गठित

मुख्यमंत्री ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। देर रात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत अभिजात और लखनऊ रेंज के एडीसीपी प्रवीण कुमार की दो सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित कर दी गई।

वहीं भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

कई सवाल छोड़ गया लखनऊ अग्निकांड

यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े कर गया है। जब भवन को वर्षों पहले अवैध घोषित किया जा चुका था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? फायर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं कराया गया? और आखिर ऐसी लापरवाही की कीमत 15 लोगों को अपनी जान देकर क्यों चुकानी पड़ी?

लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक दर्दनाक उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

Leave a Comment

Pelli Poola Jada
best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई