फूलपुर में रातों-रात गली के बीच गड़ा सीमेंट का खंभा! स्कूली बसों का रास्ता रोका, किसके आदेश पर हुई कार्रवाई?
नगर पंचायत फूलपुर के पुराने मिर्च मंडी स्थित न्यू कॉलोनी के सामने एक गली में रास्ता बाधित किए जाने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों से इस मार्ग को लेकर विवाद चल रहा था। इसी बीच शुक्रवार की रात गली के बीचों-बीच सीमेंट का खंभा गाड़ दिया गया, जिससे स्कूली बसों और अन्य वाहनों के आवागमन पर असर पड़ा है।

स्थानीय लोगों का एक पक्ष यह कहता है कि पहले इस गली से न तो स्कूली बसें गुजरती थीं और न ही बच्चों का आवागमन होता था। उनका तर्क है कि अब अचानक इस मार्ग का उपयोग क्यों किया जा रहा है और वे इस रास्ते से बसों के संचालन का विरोध कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह एक सार्वजनिक मार्ग है और इसी रास्ते से लंबे समय से कई मान्यता प्राप्त सीबीएसई एवं यूपी बोर्ड के विद्यालयों की बसें आती-जाती रही हैं। जानकारी के अनुसार, संबंधित विद्यालय के दो प्रवेश एवं निकास द्वार हैं और छात्रों की अधिक संख्या तथा भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से दोनों मार्गों का उपयोग किया जाता है, ताकि बच्चों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो और फोटो भी सामने आए हैं। इन दृश्यों में गली के बीच लगाए गए सीमेंट के खंभे और वहां की स्थिति देखी जा सकती है। हालांकि, इनकी आधिकारिक पुष्टि और पूरे मामले की जांच करना प्रशासन का विषय है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला प्रशासन के संज्ञान में भी है। इसके बावजूद यदि किसी व्यक्ति या समूह ने बिना सक्षम प्रशासनिक अनुमति के सार्वजनिक मार्ग पर सीमेंट का खंभा स्थापित किया है, तो यह गंभीर जांच का विषय है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गली के बीच सीमेंट का खंभा किसने और किस अधिकार के तहत गाड़ा? सार्वजनिक रास्ते को बाधित करने की अनुमति किसने दी? स्कूली बसों को रोकने का निर्णय किसने लिया? यदि यह सरकारी या सार्वजनिक मार्ग है, तो कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस पूरे मामले को किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक स्वरूप देने के बजाय कानून और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि समय रहते प्रशासन ने प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो सकता है।
वीडियो और फोटो में दिखाई दे रहे तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और यदि किसी ने बिना वैधानिक अधिकार के सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध खड़ा किया है, तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही दोनों पक्षों की बात सुनकर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे कानून-व्यवस्था बनी रहे और स्कूली बच्चों, अभिभावकों तथा आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।







