फूलपुर में गली के बीच खंभा बना विवाद का केंद्र! अब खंभे पर लिखा—’भारी गाड़ियों का प्रवेश वर्जित’, उठे कई बड़े सवाल
आजमगढ़ के फूलपुर नगर पंचायत क्षेत्र की न्यू कॉलोनी में गली के बीच लगाए गए खंभे का मामला अब नया मोड़ ले चुका है पहले जहां खंभा लगाए जाने को लेकर विवाद था, वहीं अब उसी खंभे पर “भारी गाड़ियों का प्रवेश वर्जित है” लिखे जाने के बाद स्थानीय लोगों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बताया जा रहा है कि स्कूली बसें अपने निर्धारित पार्किंग स्थल तक नहीं पहुंचेंगी, तो मुख्य सड़क पर जाम और अव्यवस्था बढ़ सकती है। आखिर इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी होगी?
फूलपुर की न्यू कॉलोनी में गली के बीच लगाए गए खंभे का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब नगर पंचायत की ओर से उसी खंभे पर “भारी गाड़ियों का प्रवेश वर्जित है” लिख दिया गया है, जिसके बाद स्थानीय लोगों में असंतोष और सवाल दोनों बढ़ गए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर इस रास्ते से स्कूली बसों का प्रवेश रोक दिया जाएगा, तो वे अपने निर्धारित पार्किंग स्थल तक कैसे पहुंचेंगी? यदि बसें मुख्य सड़क पर ही खड़ी होंगी, तो वहां जाम, भीड़ और यातायात की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में भविष्य में कोई दुर्घटना या अव्यवस्था होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? लोग यह भी पूछ रहे हैं कि भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित करना ही उद्देश्य था, तो गली के बीच स्थायी सीमेंट का खंभा लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या इसके लिए राजस्व विभाग, पुलिस और सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति या आदेश लिया गया था?और यह किस अधिनियम के तहत नगर पंचायत द्वारा खंभा लगाया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक मार्ग की चौड़ाई, उसकी स्थिति और आवागमन से जुड़े मामलों का परीक्षण सामान्यतः संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक विभागों के अधिकार क्षेत्र का विषय होता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना भी आवश्यक है कि इस कार्रवाई से पहले संबंधित विभागों की क्या भूमिका रही।
एक और बड़ा सवाल कार्रवाई के समय को लेकर भी उठ रहा है। नागरिकों का कहना है कि अगर यह कार्य जनहित में किया गया था, तो इसे दिन के समय, सार्वजनिक रूप से और पूर्व सूचना देकर भी किया जा सकता था। आखिर यह कार्रवाई रातों-रात क्यों की गई? क्या स्थानीय लोगों, विद्यालय प्रबंधन या संबंधित विभागों को पहले से इसकी जानकारी दी गई थी? अगर नहीं, तो इसकी क्या वजह थी?
कुछ का यह भी कहना है कि अगर नगर पंचायत भारी गाड़ियों के प्रवेश को लेकर नियम लागू कर रही है, तो क्या नगर के अन्य ऐसे मार्गों पर भी समान व्यवस्था लागू की जाएगी, जहां बड़े वाहनों का आवागमन होता है, या यह व्यवस्था केवल इसी स्थान तक सीमित रहेगी?
जबकि नगर पंचायत की प्राथमिक जिम्मेदारी साफ-सफाई, जल निकासी, सड़क प्रकाश व्यवस्था, अतिक्रमण हटाना और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना है। यदि किसी सार्वजनिक मार्ग को लेकर विवाद था, तो उसका समाधान सभी संबंधित विभागों, स्थानीय प्रशासन और दोनों पक्षों को साथ लेकर कानून के दायरे में किया जाना चाहिए था।
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की निगाहें प्रशासन की ओर हैं। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत इस मामले पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हैं और गली के बीच लगाए गए खंभे को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब किस प्रकार दिया जाता है।








