यूपी में 26 हज़ार से ज़्यादा सरकारी स्कूल बंद होने का दावा, अखिलेश यादव ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए कई बड़े सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज़ हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार से शुरू हो रहे विधानमंडल सत्र से एक दिन पहले योगी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में विलय के नाम पर 26,386 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। उनका आरोप है कि इसका सबसे ज़्यादा असर गरीब, ग्रामीण और दूर-दराज़ के इलाकों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि कक्षा 1 से 8 तक के करीब 1.40 लाख स्वीकृत शिक्षकों के पद कम कर दिए गए हैं। वहीं प्राथमिक स्कूलों में 62,465 शिक्षकों की संख्या घट गई है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों को बेहतर शिक्षा कैसे मिलेगी।
सपा प्रमुख ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, प्रदेश के करीब 7,000 सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है, जबकि 23,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए क्रियाशील शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा 576 स्कूलों में पेयजल की सुविधा नहीं है और करीब 23,000 स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर की व्यवस्था भी नहीं है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों में शिक्षक, बिजली, पानी, शौचालय और कंप्यूटर जैसी बुनियादी सुविधाएं ही नहीं होंगी, तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी।
गौरतलब है कि सोमवार से उत्तर प्रदेश विधानमंडल का सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि शिक्षा व्यवस्था का यह मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठ सकता है।








