JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों पर उग्र हुआ छात्र आंदोलन, सरकार ने बातचीत का दिया न्योता

रांची। झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई दिनों से छात्र अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठे हैं। बढ़ते आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यह केवल झारखंड तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और परीक्षा संबंधी मामलों की जांच कराई जा रही है।
CID-SIT जांच में तेजी का दावा
राज्य सरकार के मुताबिक, मामले की जांच के लिए CID और SIT की टीमें सक्रिय हैं और जांच में तेजी लाई गई है। सरकार का कहना है कि परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों में जो भी लोग संलिप्त पाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियों की ओर से कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की भी जानकारी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से भी मुलाकात की और उन्हें छात्रों के आंदोलन तथा मामले की जांच में हुई प्रगति से अवगत कराया।
11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए तैयार
सरकार की बातचीत की पेशकश के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया है। इसमें आठ छात्र प्रतिनिधि, दो पत्रकार और एक अधिवक्ता शामिल हैं। हालांकि, छात्रों ने बातचीत को लेकर अपनी कुछ शर्तें भी रखी हैं।
छात्रों का कहना है कि सरकार के साथ बैठक में उनकी मांगें केवल छात्र प्रतिनिधि ही रखेंगे। इसके अलावा पूरी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग भी की गई है, ताकि वार्ता में रखी गई बातों और सरकार के जवाब को लेकर बाद में कोई विवाद न हो।
CBI-ED जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग
आंदोलनकारी छात्र मौजूदा CID जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी प्रमुख मांगों में कथित परीक्षा गड़बड़ी की CBI और ED से जांच, संदिग्ध अथवा दागी परीक्षाओं को रद्द करना और परीक्षा की OMR शीट सार्वजनिक करना शामिल है।
छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मांगें नहीं मानीं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी
छात्र संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि बातचीत के जरिए उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। छात्रों ने विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेराव की चेतावनी भी दी है।
सरकार की बातचीत की पहल के बाद अब निगाहें प्रस्तावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन के समाधान का रास्ता खुल सकता है। वहीं, छात्रों की प्रमुख मांगों पर सरकार का रुख स्पष्ट होने के बाद ही आंदोलन की अगली दिशा तय होने की संभावना है।








