फूलपुर में दबिस्तान-ए-अयाज़ का तरही मुशायरा आयोजित, शायरों ने पेश किया उम्दा कलाम
फूलपुर, आज़मगढ़। गत रात्रि दबिस्तान-ए-अयाज़ का तरही मुशायरा फूलपुर तहसील मोड़ स्थित ज़ेड एफ एम कार्यालय पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आग़ाज़ हसब-ए-मामूल तिलावत-ए-कलामुल्लाह से साक़िब जमाल ने किया।अध्यक्षता डॉ. शफ़ीक़ आज़मी और निज़ामत नसीम साज़ ने की।
दौरान-ए-निज़ामत नसीम साज़ ने कहा कि उर्दू को असल फ़रोग़ माहाना तरही मुशायरों और अदबी नशिस्तों से होता है। यह उर्दू और उर्दू वालों के लिए ख़ुशी की बात है कि आज भी उर्दू अदब के हवाले से महफ़िलों का आयोजन किया जाता है। तरही मुशायरे होते हैं, जहाँ शोरा-ए-कराम अपने फ़न की तबा-आज़माई करते हैं। इस तरह उर्दू अदब को नायाब हीरे मिलते हैं, जो आगे चलकर उर्दू अदब की आबियारी करते हैं।ज़ेड एफ एम फ़ाउंडेशन और ज़ीशान अहमद ख़ान की कारगुज़ारी और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का जज़्बा जगज़ाहिर है। फ़ाउंडेशन का मक़सद अदब को फ़रोग़ देना और समाज के दबे-कुचले तबक़े तक तालीम, बीमारों तक दवा और सहूलियात का सामान मुहैया कराना है।शोरा के मुन्तख़ब अशआर नज़र-ए-क़ारईन हैं
घर की रौनक हुई ख़त्म सब
एक आँगन की दीवार से
डॉ. शफ़ीक़ आज़मी
एक सिपाही को महँगा पड़ा
छेड़ कर जंग सालार से
सुहैल अख़्तर सिकरौरी
आ गया जब अना का सवाल
हम तो उठ आए दरबार से
मुख़्तार आलम आज़मी
मेरी दहलीज़ की अहमियत
तुम न समझोगे मीनार से
मैकश आज़मी फूलपुरी
अहल-ए-ख़ाना हैं बेज़ार से
अपने बच्चों के किरदार से
नसीम साज़
इतने धोखे मिले हैं कि अब
मुझको लगता है डर प्यार से
अनवर इस्लाही
पा गया इक नगीना कोई
एक कूड़े के अंबार से
डॉ. अनवर इस्लाही
ये तो मग़रिब की तहज़ीब है
क्यों उठा लाए बाज़ार से
आज़म भादवी
हम वो दरवेश-ए-दौराँ हैं जो
दूर रहते हैं ज़रदार से
साक़िब जमाल
बच न पाया कोई आज तक
ऐ मोहब्बत तेरे वार से
रफ़ीक़ फूलपुरी
हुक्म रब्ब-ए-ख़ुदा गर हुआ
फूल आ जाएँगे ख़ार से
अबू साद आज़मी
कौन गुज़रा है मेरी तरह
उम्र भर राह-ए-पुरख़ार से
अबू शहमा शीराज़ी
मेरा घर आज सूना नहीं
मेरे बच्चों की किलकार से
साजिद बद्र
ज़ुल्म हाकिम ही करने लगे
क्या तलब रखें तलवार से
अहमद परवाज़
दिल को मेरे सुकूं मिल गया
आप के एक दीदार से
अनवर आज़मी
इसके अलावा तसकीन आज़मी, डॉ. फ़ैयाज़ अलीग़, डॉ. रिज़वान मुहज़बी वग़ैरह ने अपना कलाम पेश किया।








