विनाशकारी बाढ़ के बाद नौ परियोजनाओं की सुरंगों में 933 लोगों के फंसे होने की सूचना, 361 को सुरक्षित निकाला गया; रसुवा और नुवाकोट जिलों में बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियान
नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है। 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा बहने के बाद आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई, जिसके चलते रसुवा और नुवाकोट जिलों की कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हो गईं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों जिलों की नौ हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में कुल 933 लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी। इनमें से अब तक 361 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि करीब 537 लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश लगातार जारी है।
मलबे और कंक्रीट से बंद हुए सुरंगों के रास्ते
बाढ़ के बाद सुरंगों के भीतर और आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। कई जगहों पर कंक्रीट और अन्य अवरोधों के कारण सुरंगों के रास्ते बंद हो गए हैं। ऐसे में बचाव दलों को फंसे हुए लोगों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया गया है कि करीब 10 हजार सुरक्षाकर्मी और बचावकर्मी राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। सुरंगों तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर खुदाई का काम किया जा रहा है। नेपाली सेना भी भारी उपकरणों के साथ राहत अभियान में लगी हुई है।
भारत की 11 सदस्यीय सुरंग बचाव विशेषज्ञ टीम मैदान में
नेपाल के बचाव अभियान में भारत भी लगातार सहयोग कर रहा है। त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में फंसे करीब 40 लोगों को निकालने के लिए भारत की 11 सदस्यीय सुरंग बचाव विशेषज्ञ टीम काम कर रही है।
इसके अलावा भारतीय सेना के 22 जवान भी मौके पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। कठिन परिस्थितियों और बंद सुरंगों के बावजूद टीमें लगातार अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
चीन की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी बचाव अभियान में जुटी
नेपाल में चल रहे इस बड़े बचाव अभियान में चीन की टीम भी मदद कर रही है। चीन की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम अपर त्रिशूली-3बी परियोजना में बचाव अभियान में जुटी हुई है।
इस तरह नेपाल की अपनी राहत एजेंसियों के साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।
अपर त्रिशूली-1 परियोजना में सबसे ज्यादा लोग फंसे
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, अलग-अलग हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में 600 से ज्यादा कर्मचारी फंसे होने की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लांगटांग खोला साइट पर अपर त्रिशूली-1 और 1बी परियोजनाओं से 254 लोगों को निकाला जा चुका है।
वहीं, त्रिशूली-1 परियोजना में करीब 500 कर्मचारी, मजदूर और इंजीनियर फंसे थे, जिनमें से लगभग 400 लोगों के अभी भी अंदर होने की आशंका जताई गई है।
कई परियोजनाओं से लोगों के फंसे होने की सूचना
अलग-अलग हाइड्रोपावर साइटों से कर्मचारियों और मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार—
अपर त्रिशूली-3बी साइट पर 213 लोग फंसे होने की सूचना मिली।
रसुवागढ़ी में 93 लोग प्रभावित हुए।
अपर त्रिशूली-3ए और लांगटांग खोला साइट पर 42-42 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई।
मेलुंग खोला में सात लोगों के फंसे होने की सूचना है।
रसुवा भोटेकोशी में चार लोग फंसे बताए गए हैं।
मध्य त्रिशूली में दो लोग फंसे होने की जानकारी मिली।
त्रिशूली-3बी हब सबस्टेशन में 16,
चिलिमे में आठ,
जबकि देवीघाट और रसुवा क्षेत्रों से भी लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरणों की कमी बनी चुनौती
राहत एवं बचाव अभियान के दौरान जरूरी और विशेष उपकरणों की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुछ आवश्यक बचाव उपकरणों की सीमित उपलब्धता के कारण पर्याप्त मात्रा में उपकरणों की खरीद नहीं हो सकी।
इस वजह से कई स्थानों पर बचाव कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद बचाव दल लगातार सुरंगों के अंदर पहुंचने के लिए खुदाई और रास्ता साफ करने का काम कर रहे हैं।
अपर त्रिशूली-3ए में विशेष बचाव दल तैनात
डिजास्टर सेंटर में दो कर्मचारी लापता बताए गए हैं। नेपाल प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अपर त्रिशूली-3ए परियोजना में विशेष बचाव दल लगाया गया है।
यह टीम मुख्य सुरंग के क्राउन तक पहुंच गई है और वहां से आगे का रास्ता बनाने का काम किया जा रहा है। बचाव दल का लक्ष्य जल्द से जल्द सुरंग के उन हिस्सों तक पहुंचना है, जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है।
नेपाल के आरोपों को चीन ने किया खारिज
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की ओर से लगाए गए आरोपों को चीन ने खारिज किया है। नेपाल की ओर से ग्लेशियरों की गतिविधियों और पानी के स्तर से जुड़ी जरूरी जानकारियां साझा नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है।
तीन भारतीयों को बचाया गया, 955 हुई मृतकों की संख्या
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा जिले के चिलिमे गांव से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।
वहीं, इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 955 हो गई है, जबकि करीब 3900 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है।
सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल में इस समय राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों, मजदूरों और इंजीनियरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। भारी मलबा, टूटे रास्ते, लगातार बदलती परिस्थितियां और आवश्यक उपकरणों की कमी बचाव कार्य को बेहद कठिन बना रही है।
इसके बावजूद नेपाल की राहत एजेंसियां, नेपाली सेना, भारत की विशेषज्ञ टीम और चीन की बचाव टीम लगातार अभियान में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरंगों तक पहुंचने और अंदर फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव की जंग लगातार जारी है और पूरे क्षेत्र की निगाहें सुरंगों में फंसे लोगों के सुरक्षित बाहर आने पर टिकी हुई हैं।








