आजमगढ़: अहरौला शंभूपुर ट्रिपल हत्याकांड के बाद परिवार के सामने परवरिश और जिम्मेदारियों का बड़ा सवाल
आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई घटना के बाद एक परिवार की पूरी तस्वीर बदल गई है। जिस घर में कुछ दिन पहले धार्मिक अनुष्ठान के दौरान चहल-पहल थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। इस घटना ने परिवार के पीछे छूट गए बच्चों और बुजुर्ग मां की देखभाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि तीन दिन से चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुए विवाद में अरविंद सिंह ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से अपनी पत्नी बबीता और दो पुरोहितों को गोली मार दी। इसके बाद वह अपने बेटे और दो बेटियों के साथ एक कमरे में बंद हो गया। करीब सात घंटे तक चली पुलिस की कार्रवाई के बाद अरविंद की मौत हो गई। वहीं, घटना में घायल उसके बेटे ने भी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना में कुल पांच लोगों की मौत हुई है।
अब बच्चों की परवरिश सबसे बड़ा सवाल
घटना के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की परवरिश की है। बताया जा रहा है कि अरविंद के चार भाइयों में से सुनील सिंह की वर्ष 2019 में हत्या हो चुकी थी। सुनील की एक बेटी है। वहीं, अब अरविंद की दो बेटियां भी पिता के साए से वंचित हो गई हैं।इस तरह एक ही परिवार की तीन बेटियों की जिम्मेदारी अब परिवार के सामने है। ऐसे में उनकी पढ़ाई, परवरिश और भविष्य को लेकर गांव में चर्चा हो रही है कि आखिर इन बच्चियों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।इसके साथ ही परिवार में मौजूद बुजुर्ग मां की देखभाल का सवाल भी सामने है। घटना के बाद परिवार के कई सदस्य असमय चले गए हैं, ऐसे में अब बुजुर्ग मां और बच्चों की देखभाल कौन करेगा, यह आने वाले समय में परिवार के लिए बड़ी चुनौती होगी।शंभूपुर की इस घटना ने कई परिवारों को प्रभावित किया है। घटना की कानूनी और पुलिस कार्रवाई अपनी जगह जारी है, लेकिन पीछे छूट गए बच्चों और बुजुर्गों के भविष्य को लेकर उठे सवालों का जवाब अब परिवार और समाज दोनों के सामने है।








