अहरौला में 34 दिव्यांगजनों को मिली ट्राई साइकिल, फूलपुर के जरूरतमंदों को लौटना पड़ा निराश

माहुल (आजमगढ़)। अहरौला विकासखंड में 34 दिव्यांगजनों को ट्राई साइकिल वितरित किए जाने के बाद लाभार्थियों के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। फूलपुर ब्लॉक क्षेत्र के कई दिव्यांगजनों का आरोप है कि आवश्यक दस्तावेज और आवेदन फॉर्म जमा करने के बावजूद उन्हें ट्राई साइकिल नहीं मिली। इनमें भारतीय दिव्यांग सेवा समिति, फूलपुर के सदस्य भी शामिल हैं, जिन्हें योजना का लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मौके पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।

दिव्यांगजनों का कहना है कि उन्होंने ट्राई साइकिल पाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया और जरूरी कागजात भी जमा किए थे। इसके बावजूद वितरण के दौरान उन्हें ट्राई साइकिल उपलब्ध नहीं कराई गई आरोप है कि मौके पर मौजूद लोगों की ओर से यह कहकर उन्हें लौटा दिया गया कि ट्राई साइकिल सीमित संख्या में ही उपलब्ध थीं और कुछ चुनिंदा लोगों को ही दी जा सकीं।

इस स्थिति से फूलपुर क्षेत्र के जरूरतमंद दिव्यांगजनों में निराशा है उनका सवाल है कि जब उन्होंने आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे, तो उन्हें लाभार्थियों की सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया? यदि ट्राई साइकिल की संख्या सीमित थी, तो लाभार्थियों के चयन के लिए कौन-से मानक अपनाए गए और शेष पात्र आवेदकों को लाभ देने की क्या व्यवस्था है?
वहीं, वितरण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि जरूरतमंदों की अपेक्षा चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता दी गई। हालांकि, चयन में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और भाजपा पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
दिव्यांगजनों के लिए ट्राई साइकिल आवागमन और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण साधन है ऐसे में पात्र लोगों द्वारा आवेदन और दस्तावेज जमा करने के बावजूद लाभ से वंचित रहने की शिकायत गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और फूलपुर ब्लॉक के उन दिव्यांगजनों को ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है, जो आवेदन करने के बाद भी खाली हाथ लौटे।
मुख्य सवाल क्या सीमित संख्या में ट्राई साइकिल उपलब्ध होने के कारण पात्र आवेदकों को वंचित रहना पड़ा, या लाभार्थियों के चयन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई? इसकी स्थिति संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।








