पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से हवाला के जरिए फंडिंग लेने का आरोप, कोर्ट ने कहा- प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री
नई दिल्ली। दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख और जेल में बंद अलगाववादी नेता मोहम्मद यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। मामला कथित तौर पर पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से हवाला चैनलों के जरिए विदेशी फंड हासिल करने और उसे जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने से जुड़ा है।

विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड पर प्रथमदृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिसके आधार पर सभी सात आरोपियों के खिलाफ मजबूत संदेह बनता है। अदालत ने पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध और धारा 4 के तहत दंड के प्रावधानों के अनुसार आरोप तय करने का निर्देश दिया।
इस मामले में यासीन मलिक के अलावा जहूर अहमद शाह वटाली, नवल किशोर कपूर, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम, अब्दुल राशिद शेख और ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड आरोपी हैं।
8.94 करोड़ रुपये की आपराधिक कमाई का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, जांच के दौरान यह सामने आया कि संबंधित अनुसूचित अपराधों से कुल 8,94,87,639 रुपये की कथित आपराधिक कमाई हुई। एजेंसी का आरोप है कि इस धनराशि को आरोपियों ने विभिन्न माध्यमों से प्राप्त किया, स्थानांतरित किया, छिपाया, अपने कब्जे में रखा अथवा इस्तेमाल किया

एनआईए की दूसरी पूरक आरोपपत्र के आधार पर रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि यासीन मलिक को वर्ष 2013 में सऊदी अरब से कथित तौर पर 15.75 लाख रुपये मिले थे। ईडी ने विदेशी फंडिंग की कुल कथित राशि 30,75,595 रुपये से संबंधित विवरण भी अदालत के समक्ष रखा।
पाकिस्तान हाई कमीशन से कैश कूरियर के जरिए रकम पहुंचाने का दावा
ईडी ने अदालत में आरोप लगाया कि धन को एक जटिल नेटवर्क के जरिए आगे भेजा गया। एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क में कैश कूरियर शामिल थे, जो नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन से कथित तौर पर रकम लेते थे और उसे हुर्रियत नेतृत्व सहित अलगाववादी नेताओं तक पहुंचाते थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और विध्वंसक गतिविधियों के लिए किया गया।
हालांकि, ये आरोप अभियोजन पक्ष और जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए हैं। अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने का आदेश मामले में अभियोजन की ओर से मुकदमा आगे बढ़ाने का चरण है और इससे आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं होती।
2017 की एनआईए एफआईआर से शुरू हुआ मामला
ईडी ने यह मामला वर्ष 2017 में एनआईए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू किया था। एनआईए ने कथित आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों तथा उनके लिए फंड जुटाने से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में ईडी ने कथित अपराध से अर्जित धन और उसके इस्तेमाल की जांच शुरू की।
अदालत में कुछ आरोपियों को सुरक्षा कारणों से शारीरिक रूप से पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद अदालत ने ईडी को न्यायिक हिरासत में मौजूद आरोपियों से आरोप संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।








