खैरा बाजार में दर्दनाक हादसा! कोचिंग जा रही 10वीं की छात्रा मुस्कान कुमारी को बालू लदे तेज रफ्तार हाइवा ने कुचला, मौके पर मौत। हादसे के बाद भड़का जनआक्रोश, सड़क जाम, थाने पर पथराव और पुलिस की हवाई फायरिंग से इलाका बना पुलिस छावनी।
जमुई बिहार से मो० आसिफ अनवर की रिपोर्ट –
बिहार के जमुई जिले के खैरा से इस वक्त की एक बहुत ही दुखद और आक्रोशित करने वाली खबर बिहार के खैरा बाजार से आ रही है। जहाँ तेज रफ्तार के कहर ने एक और मासूम की जिंदगी छीन ली। सुबह-सुबह कोचिंग जा रही 10वीं की छात्रा मुस्कान कुमारी को बालू लदे एक बेकाबू हाइवा ने कुचल दिया। हादसे में मुस्कान की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में उबाल है। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया है, गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई है और पुलिस प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
यह चीख-पुकार, यह मातम और यह सुलगता आक्रोश गवाही दे रहा है उस बेकाबू रफ्तार की, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया। घटना गुरुवार सुबह की है। रोज की तरह 10वीं की छात्रा मुस्कान कुमारी अपनी साइकिल से कोचिंग के लिए निकली थी। लेकिन खैरा बाजार के पास मौत बनकर आ रहे एक तेज रफ्तार बालू लदे हाइवा ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मुस्कान को संभलने तक का मौका नहीं मिला और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
हादसे के बाद का बवाल
मुस्कान की मौत की खबर जैसे ही फैली, पूरा इलाका सुलग उठा। स्थानीय लोग और छात्र सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने ट्रक में जमकर तोड़फोड़ की और मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया। देखते ही देखते खैरा बाजार एक पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। गुस्साए लोगों ने थाने पर भी पथराव कर दिया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग तक करनी पड़ी। फिलहाल पूरे इलाके में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।

स्थानीय निवासी लोगों ने कहा “यहाँ रोज तेज रफ्तार गाड़ियाँ बालू लादकर भागती हैं। प्रशासन को कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। आज एक बेटी चली गई, इसका जिम्मेदार कौन है? जब तक न्याय नहीं मिलेगा, जाम नहीं हटेगा।”

इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासन के दावों और ओवरलोडेड, तेज रफ्तार ट्रकों पर लगने वाले लगाम की पोल खोल कर रख दी है। खैरा में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचकर लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सवाल वही है कि आखिर कब तक मासूम बच्चे इन बेलगाम रफ्तार वाले ट्रकों का शिकार होते रहेंगे?








