67 लाख रुपये मासिक खर्च, फिर भी गांवों की सफाई बदहाल; सफाईकर्मियों से लेकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल
फूलपुर (आजमगढ़)। फूलपुर ब्लॉक की 89 ग्राम पंचायतों को स्वच्छ रखने के लिए 158 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है इनके वेतन और मानदेय पर सरकार हर माह करीब 67 लाख रुपये खर्च कर रही है इसके बावजूद कई गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। चकरमार्ग,सार्वजनिक स्थलों और नालियों में गंदगी,झाड़ियां और घास-फूस की समस्या बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था खराब होने के पीछे केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि सफाईकर्मियों की लापरवाही भी प्रमुख कारण है कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी जमा रहती है वहीं, ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधानों की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी और सफाईकर्मियों से काम कराने की जिम्मेदारी तय तरीके से नहीं निभाई जा रही है।
इसके साथ ही सफाई व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं यदि नियमित स्थलीय निरीक्षण किया जाए तो सफाईकर्मियों और ग्राम पंचायत स्तर पर बरती जा रही लापरवाही सामने आ सकती है ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदारी केवल सफाईकर्मियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए,बल्कि ग्राम पंचायत के प्रधान से लेकर संबंधित सचिव और निगरानी करने वाले अधिकारियों तक जवाबदेही तय होनी चाहिए सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए मोबाइल से फोटो लेकर रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था भी बताई गई है आरोप है कि कई जगह वास्तविक स्थलीय निरीक्षण के बजाय फोटो के आधार पर ही कार्य की निगरानी की जा रही है।
करीब 15 दिन पहले फूलपुर ब्लॉक का पदभार संभालने वाले एडीओ पंचायत संदीप झानवीर ने बताया कि सफाई व्यवस्था की जांच कराई जा रही है अभिलेखों की जांच के साथ गांवों में स्थलीय निरीक्षण कर सत्यापन किया जाएगा कमी मिलने पर संबंधित सचिव,सफाईकर्मी अथवा जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।
ग्रामीणों की मांग है कि सफाईकर्मियों के साथ ग्राम प्रधानों और संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो,ताकि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद गांवों में सफाई व्यवस्था बदहाल रहने की स्थिति दोबारा न बने।








