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एमएलसी चुनाव बना प्रतिष्ठा का सवाल, सीएम योगी ने संभाली कमान; यूपी में भाजपा-सपा के बीच बढ़ी सियासी हलचल

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एमएलसी चुनाव बना प्रतिष्ठा का सवाल, सीएम योगी ने संभाली कमान; यूपी में भाजपा-सपा के बीच बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश के 72 जिलों तक फैले चुनावी क्षेत्र में भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इन एमएलसी चुनावों को दोनों दलों के लिए अपनी राजनीतिक ताकत परखने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा ने चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए क्लीन स्वीप का लक्ष्य रखा है, वहीं सपा अपने समीकरणों और रणनीति के जरिए चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली है। वह गोरखपुर से आगरा तक भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में संवाद और सम्मेलनों के जरिए चुनावी माहौल बनाने में जुटे हैं। पार्टी का प्रयास है कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जाए और इसका फायदा आगामी विधानसभा चुनाव में भी मिले।

भाजपा ने प्रत्याशियों के समर्थन में तेज की गतिविधियां

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 7 अक्टूबर को वाराणसी दौरे के दौरान एमएलसी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की थी पार्टी ने वाराणसी खंड स्नातक क्षेत्र से केदारनाथ सिंह को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला सपा के आशुतोष सिन्हा से होगा वहीं, शिक्षक खंड सीट पर भाजपा के प्रमोद मिश्रा के सामने सपा के लाल बिहारी यादव चुनाव मैदान में हैं। इन सीटों पर दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में करीब 12 हजार शिक्षकों से संवाद किया गोरखपुर-अयोध्या खंड के 17 जिलों में इस संवाद को भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी के सामने सपा ने संजय त्रिपाठी को मैदान में उतारा है चुनाव के नतीजों का असर आजमगढ़, गोरखपुर और अयोध्या मंडलों की राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दोनों दल मतदाताओं तक पहुंचने और अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

कई जिलों में शिक्षक-स्नातक मतदाताओं से संवाद करेंगे योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलग-अलग क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में कार्यक्रम कर रहे हैं। अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, वह 14 अक्टूबर को वाराणसी में स्नातक खंड और 15 अक्टूबर को मीरजापुर में शिक्षक खंड के प्रत्याशियों के समर्थन में संवाद करेंगे इसके अलावा प्रयागराज-झांसी स्नातक खंड के प्रत्याशियों के समर्थन में भी मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रस्तावित है। भाजपा की कोशिश है कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाकर चुनावी बढ़त हासिल की जाए।

बरेली-मुरादाबाद सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक खंड सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह दिल्लो के समर्थन में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन किया। इस सीट पर चुनावी मुकाबले को लेकर दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं वहीं, भाजपा ने शिक्षक नेता सुरेश त्रिपाठी को टिकट नहीं दिया है। इसे लेकर पार्टी के एक वर्ग में नाराजगी की चर्चा है। ऐसे में भाजपा के सामने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की चुनौती भी है।

प्रयागराज और आगरा में भी चुनावी रणनीति पर जोर

भाजपा के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 15 अक्टूबर को प्रयागराज में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में रहेंगे यहां भाजपा ने अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया है, जिनका मुकाबला सपा के एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव से होगा इसके बाद 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आगरा में संवाद के जरिए चुनावी रणनीति को धार देंगे यहां भाजपा के डॉ. मानवेंद्र सिंह के सामने अपनी सीट पर पकड़ बनाए रखने की चुनौती है दूसरी ओर, सपा ने शशांक यादव को टिकट दिया है। वहीं, राज परिवार से संबंध रखने वाले अमरीशपाल सिंह के निर्दलीय उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना जताई जा रही है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम माने जा रहे एमएलसी चुनाव

उत्तर प्रदेश के इन एमएलसी चुनावों को केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। भाजपा और सपा दोनों के लिए यह चुनाव अपने संगठन, मतदाता संपर्क और राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा है भाजपा जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सभी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही है, वहीं सपा अपने प्रत्याशियों के जरिए चुनौती पेश कर रही है अब देखना होगा कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं का रुख किस दल के पक्ष में जाता है और चुनावी नतीजे प्रदेश की राजनीति में किस तरह का संदेश देते हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन परिणामों को दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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