खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर देशद्रोह के मुकदमे में फंसाने की दी थी धमकी, मोबाइल, 4 सिम कार्ड और 3 एटीएम कार्ड समेत अन्य सामान बरामद
आजमगढ़, 14 अक्टूबर 2026। साइबर ठगी के एक मामले में आजमगढ़ पुलिस ने वांछित अभियुक्त को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को देशद्रोह के मुकदमे में फंसाने का भय दिखाया गया और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उससे ₹26.70 लाख की ठगी की गई। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान उमान अली (24) पुत्र चांद अली, निवासी तालाब गगनी शुक्ल, जनपद लखनऊ के रूप में हुई है।
व्हाट्सएप कॉल कर डिजिटल अरेस्ट का दिखाया डर
पुलिस के अनुसार, गंभीरपुर निवासी राधेश्याम यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप कॉल कर स्वयं को सीआईओ अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित के बैंक खाते से गलत लेनदेन होने और उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने की बात कहकर भयभीत किया। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उसके खातों से ₹26,70,000 की धनराशि अपने खातों में ट्रांसफर करा ली।
इस शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम, आजमगढ़ में मुकदमा अपराध संख्या 32/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पूर्व में गिरफ्तार आरोपी से मिला सुराग
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में साइबर क्राइम पुलिस टीम मामले की विवेचना कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में जहांगीर आलम को 20 अगस्त 2026 को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। उसके बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उमान अली का नाम सामने आया। जांच में प्राप्त साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया।
मोबाइल, चार सिम और तीन एटीएम कार्ड बरामद
गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से पुलिस ने निम्नलिखित सामान बरामद किया है:
एक सैमसंग Z Fold 4 मोबाइल फोन,चार सिम कार्ड, तीन एटीएम कार्ड,एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड,₹1,770 नकद
इस तरह करते थे साइबर ठगी
पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर लोगों को पुलिस या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देते थे। गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर उनके बैंक खातों से रकम ट्रांसफर कराई जाती थी।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी एवं 66डी के तहत मुकदमा दर्ज है।
साइबर क्राइम पुलिस टीम ने की गिरफ्तारी
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक रजत सिंह तथा कांस्टेबल एजाज खान, सभाजीत मौर्य, संजय कुमार और महिपाल यादव शामिल रहे।
साइबर सुरक्षा संदेश: किसी अनजान व्यक्ति के पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताने पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर धनराशि मांगना साइबर ठगी का तरीका हो सकता है। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें या आधिकारिक पोर्टल https://www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।








