संसद घटा सकती है वैश्विक तनाव, ब्रिक्स देशों से संवाद और सहयोग बढ़ाने का ओम बिरला ने किया आह्वान
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वैश्विक तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए ब्रिक्स देशों की संसदों के बीच संवाद, कूटनीति और सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष, युद्ध, आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित होती है ओम बिरला सोमवार को नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित ब्रिक्स देशों के दो दिवसीय 12वें संसदीय मंच को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों से साझा प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में बदलने का आह्वान किया।
वैश्विक चुनौतियों के समाधान में संसदों की अहम भूमिका
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दुनिया इस समय गहरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। क्षेत्रीय संघर्षों और युद्धों के अलावा व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने हैं। इन समस्याओं का असर राष्ट्रीय सीमाओं से आगे तक पहुंचता है उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए देशों के बीच भरोसा बढ़ाना और सामूहिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। इस दिशा में संसदें संवाद और कूटनीति के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग पर जोर
ओम बिरला ने ब्रिक्स देशों की संसदों से आपसी संवाद को मजबूत करने और साझा मुद्दों पर मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद बातचीत और सहयोग के रास्ते खुले रहने चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता और शांति को बढ़ावा मिल सके संसदीय मंच में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ साझेदार देशों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा प्रतिबद्धताओं को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने पर चर्चा हो रही है।
शांतिपूर्ण समाधान से मजबूत होगा अंतरराष्ट्रीय भरोसा
लोकसभा अध्यक्ष के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि वैश्विक तनाव कम करने के लिए केवल राष्ट्रीय प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। देशों के बीच समन्वय, आपसी विश्वास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना आवश्यक है। संसदों के माध्यम से संवाद को प्रोत्साहित कर वैश्विक समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।








