पंचायतों में ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति तथा प्रतिनिधित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर हुई विस्तृत चर्चा,जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उनके विचार, अनुभव एवं सुझाव लिखित रूप में किए गए संकलित
आजमगढ़, 29 अक्टूबर, 2026// आगामी त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के दृष्टिगत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण की स्थिति का तथ्यपरक आकलन करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा जनपद आजमगढ़ में जमीनी स्तर पर स्थिति की पड़ताल की गई। इस क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार, आजमगढ़ में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग के सदस्यगण बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा,एस पी सिंह व ओएसडी डॉ मो. असलम अंसारी उपस्थित रहे।
बैठक में जनपद की पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में उनकी भागीदारी, वर्तमान प्रतिनिधित्व तथा आरक्षण व्यवस्था से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों, स्थानीय परिस्थितियों तथा जनप्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का समुचित एवं तथ्यपरक आकलन किए जाने पर विशेष जोर दिया गया।
त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन से संबंधित आवश्यक जानकारियां आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गईं
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी कमलकिशोर कंडारकर एवं मुख्य राजस्व अधिकारी संजीव ओझा ने आयोग के समक्ष जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन से संबंधित आवश्यक जानकारियां प्रस्तुत कीं। अधिकारियों ने पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्तमान प्रतिनिधित्व तथा उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के संबंध में आयोग को अवगत कराया।
इस दौरान आगामी पंचायत चुनावों के दृष्टिगत आरक्षण व्यवस्था, निर्धारित आरक्षण प्रतिशत तथा नियमानुसार आरक्षण लागू किए जाने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। साथ ही, पंचायतों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए उपलब्ध सूचनाओं एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त होने वाले अनुभवजन्य साक्ष्यों के महत्व पर भी विचार किया गया।
आयोग द्वारा इस बात पर बल दिया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से संबंधित आकलन के लिए प्रासंगिक तथ्यों, स्थानीय परिस्थितियों और संबंधित साक्ष्यों का समुचित अध्ययन किया जाना आवश्यक है, ताकि जनपद में पिछड़े वर्ग की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति के आकलन पर विशेष जोर
आयोग की बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के लिए समकालीन अनुभवजन्य साक्ष्यों के संकलन पर विशेष जोर दिया गया। पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग की भागीदारी, प्रतिनिधित्व तथा स्थानीय स्तर पर उनकी स्थिति से संबंधित तथ्यों की जानकारी प्राप्त की गई। इस क्रम में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपलब्ध सूचनाओं, संबंधित अभिलेखों तथा जनप्रतिनिधियों के अनुभवों को महत्वपूर्ण माना गया। आयोग ने पंचायतों में पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए विभिन्न पक्षों से जानकारी प्राप्त की तथा इस प्रक्रिया में तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाए जाने पर बल दिया।
बैठक में पंचायतों में ओबीसी वर्ग की भागीदारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया कि आकलन की प्रक्रिया में स्थानीय परिस्थितियों एवं उपलब्ध साक्ष्यों को उचित महत्व दिया जाए। आगामी त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के संदर्भ में आरक्षण संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श के दौरान संबंधित तथ्यों एवं जानकारियों के व्यवस्थित संकलन पर भी बल दिया गया।
ब्लॉक प्रमुखों, वार्ड सदस्यों एवं ग्राम पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों से किया गया संवाद
आयोग द्वारा जनपद के विभिन्न ब्लॉक प्रमुखों, वार्ड सदस्यों तथा ग्राम पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों से संवाद स्थापित कर उनके विचार, अनुभव एवं सुझाव प्राप्त किए गए। आयोग के सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग की भागीदारी, प्रतिनिधित्व एवं स्थानीय परिस्थितियों से जुड़े उनके अनुभवों की जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत विचारों एवं सुझावों को प्रश्नोत्तरी के माध्यम से लिखित रूप में भी संकलित किया गया। प्राप्त जानकारियों को जनपद में ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति तथा पंचायतों में उसके प्रतिनिधित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं के समुचित आकलन की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।
जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद के माध्यम से स्थानीय स्तर पर मौजूद परिस्थितियों, अनुभवों एवं सुझावों को समझने का प्रयास किया गया। आयोग की इस पहल का उद्देश्य उपलब्ध तथ्यों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्राप्त जानकारी को भी आकलन की प्रक्रिया में उचित महत्व देना रहा, जिससे पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से संबंधित विषयों का समग्र दृष्टिकोण से परीक्षण किया जा सके।
स्थानीय परिस्थितियों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्यपरक आकलन पर बल
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति के आकलन में केवल उपलब्ध आंकड़ों तक सीमित न रहकर स्थानीय परिस्थितियों, जनप्रतिनिधियों के अनुभवों तथा संबंधित साक्ष्यों को भी ध्यान में रखा जाए। पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी और प्रतिनिधित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से प्राप्त सूचनाओं का महत्व रेखांकित किया गया।
आयोग द्वारा जनपद स्तर पर उपलब्ध तथ्यों एवं जानकारियों के आधार पर ओबीसी वर्ग की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए संबंधित पक्षों से संवाद किया गया। बैठक में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के दृष्टिगत आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा करते हुए नियमानुसार आरक्षण लागू किए जाने से संबंधित पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस प्रकार बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारियों तथा विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधियों के विचारों एवं सुझावों को एकत्र कर अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व की स्थिति का तथ्यपरक आकलन करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि जय प्रकाश यादव व अन्य जन प्रतिनिधियों सहित जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत वर्तिका त्रिपाठी, जिला सूचना अधिकारी डॉ0 पंकज कुमार, जिला पिछड़ा कल्याण अधिकारी चेतन, जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी सहित जनपद के विभिन्न ब्लॉक प्रमुखगण, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, वार्ड सदस्य तथा संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।








