जनसेवा की एक पहचान रहे अरशद सिद्दीकी का निधन, आजमगढ़ समेत कई क्षेत्रों में शोक
आजमगढ़/मुंबई। समाजसेवा और जनहित के कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले अरशद सिद्दीकी के निधन की खबर से आजमगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई है। उनके आकस्मिक निधन को सामाजिक और जनसेवी क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
मूल रूप से आजमगढ़ जिले के फूलपुर विकासखंड अंतर्गत बरौली गांव निवासी अरशद सिद्दीकी लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। उनके निधन की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया। स्थानीय लोगों के अनुसार वे सरल, मिलनसार और मददगार व्यक्तित्व के धनी थे।
अरशद सिद्दीकी, रेड क्रिसेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन एवं पूर्व सांसद इलियास आज़मी के पुत्र तथा डॉ. अलीम सिद्दीकी के छोटे भाई थे। सामाजिक सरोकारों में उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें व्यापक पहचान मिली थी।
जानकारों के अनुसार उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों की सहायता और समाजहित के कार्यों में लगाया। विभिन्न सामाजिक अभियानों और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय उपस्थिति रहती थी। लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए उनका प्रयास उन्हें समाज के बीच लोकप्रिय बनाता था।
सामाजिक गतिविधियों के अलावा उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभाई। वे बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे और धौरहरा लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में भी उतर चुके थे। जनसंपर्क और सामाजिक कार्यों के कारण उनका व्यापक परिचय रहा।
मीडिया जगत से जुड़े लोगों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया।
परिजनों और करीबी सूत्रों के मुताबिक, उनका निधन हृदयाघात के कारण हुआ। उनकी नमाज-ए-जनाजा शुक्रवार शाम मुंबई के मरीन लाइन्स स्थित बड़े कब्रिस्तान में अदा किए जाने की जानकारी दी गई है, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
अरशद सिद्दीकी के निधन को उनके परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों के साथ-साथ समाज के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। जनसेवा और सामाजिक सौहार्द के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।








