भांजे की गला रेतकर हत्या करने वाले मामा को फांसी की सजा, अदालत ने बताया ‘दुर्लभतम अपराध’
गाजीपुर। अपने चार वर्षीय भांजे की गला रेतकर निर्मम हत्या करने वाले मामा अमजद को अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने गुरुवार को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है तथा यह राशि मृतक बच्चे की मां को दिए जाने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश सिंह ने अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाहों को प्रस्तुत किया। इनमें दोषी की तीन सगी बहनों और एक भाई की गवाही को न्यायालय ने दोष सिद्ध करने का महत्वपूर्ण आधार माना।
अदालत ने माना दुर्लभतम श्रेणी का अपराध
फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि यह मामला “दुर्लभतम से भी दुर्लभ” श्रेणी का अपराध है। मासूम बच्चे की हत्या अत्यंत क्रूर, बर्बर और अमानवीय तरीके से की गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्चे की श्वासनली, भोजन नली, प्रमुख रक्त वाहिनियां तथा गर्दन की पहली हड्डी तक कट चुकी थी। गर्दन के पीछे केवल लगभग चार सेंटीमीटर हिस्सा ही जुड़ा रह गया था।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि हमले के दौरान बच्चे ने स्वयं को बचाने का प्रयास किया होगा, जिसकी पुष्टि उसकी उंगलियों पर मिले चोट के निशानों से होती है। अदालत ने कहा कि चार वर्ष की आयु में किसी बच्चे को भलाई-बुराई या किसी विवाद की समझ नहीं होती, इसके बावजूद उसके साथ क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दी गईं।
मां के दर्द का किया उल्लेख
अदालत ने कहा कि जिस मां ने अपने ही भाई के हाथों अपने चार वर्षीय बेटे की बेरहमी से हत्या होते देखी हो, उसके दर्द को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
पछतावा नहीं, दी धमकी
सजा सुनाए जाने से पहले न्यायालय ने दोषी अमजद से पूछा कि क्या उसे अपने कृत्य पर कोई पछतावा है। इस पर उसने कहा, “मुझे कोई पछतावा नहीं है। मुझसे जो उलझेगा, उसे मार डालूंगा।”
इस बयान को भी न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि दोषी के सुधार की कोई संभावना दिखाई नहीं देती। अदालत ने माना कि मानवता को झकझोर देने वाले इस अपराध के लिए मृत्युदंड ही उपयुक्त दंड है।
फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को पुलिस अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।








