सीपू हत्याकांड के बाद हुए बवाल का मुकदमा वापस, 63 आरोपितों को राहत; पूर्व विधायक की पत्नी मांग पर अदालत ने दी मंजूरी!
आजमगढ़। सगड़ी के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह ‘सीपू’ की हत्या के बाद वर्ष 2013 में जीयनपुर कस्बे में हुए आगजनी और बवाल के मामले में दर्ज मुकदमों को शासन ने वापस ले लिया है। अभियोजन विभाग की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट (सीनियर डिवीजन) के न्यायाधीश अतुल पाल ने शनिवार को दोनों मुकदमों को वापस लेने की अनुमति देते हुए उन्हें समाप्त कर दिया। इस फैसले से कुल 63 आरोपितों को राहत मिली है। इनमें से एक आरोपित प्रभुनाथ सिंह की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।
दो मुकदमों में 63 आरोपितों पर थी कार्रवाई
सीपू हत्याकांड के बाद जीयनपुर में हुए बवाल को लेकर दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। पहले मुकदमे में तत्कालीन जीयनपुर इंस्पेक्टर विजय सिंह की तहरीर पर 49 नामजद और करीब 1000 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जांच के बाद पुलिस ने 42 आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की थी।
दूसरा मुकदमा 36वीं वाहिनी पीएसी के वाहन चालक संजय सिंह की ओर से दर्ज कराया गया था, जिसमें 21 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
फरवरी 2026 में दिया गया था मुकदमा वापस लेने का प्रार्थना पत्र
पूर्व विधायक सीपू सिंह की पत्नी और पूर्व विधायक वंदना सिंह ने प्रदेश सरकार से मुकदमे वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद फरवरी 2026 में अभियोजन विभाग ने अदालत में मुकदमे वापस लेने का प्रार्थना पत्र दाखिल किया। शनिवार को अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए दोनों मुकदमों को समाप्त कर दिया। वंदना सिंह ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस फैसले की पुष्टि करते हुए इसे प्रदेश सरकार का जनहित में लिया गया निर्णय बताया।
19 जुलाई 2013 को हुई थी सीपू सिंह की हत्या
गौरतलब है कि 19 जुलाई 2013 की सुबह जीयनपुर स्थित आवास पर पूर्व विधायक सर्वेश सिंह ‘सीपू’ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में माफिया ध्रुव सिंह उर्फ पिंटू सिंह समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
हत्या के बाद जीयनपुर कस्बे में व्यापक बवाल हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच टकराव हुआ, पुलिसकर्मियों के हथियार छीन लिए गए और पुलिस व पीएसी के वाहनों में आग लगा दी गई थी। इसी घटना को लेकर दोनों मुकदमे दर्ज किए गए थे।
सीपू हत्याकांड में सात दोषी काट रहे हैं उम्रकैद
सीपू हत्याकांड के मुख्य मामले में तत्कालीन विशेष सत्र न्यायाधीश रामानंद की अदालत ने माफिया ध्रुव कुमार सिंह उर्फ पिंटू सिंह समेत सात आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अन्य दोषियों में मृत्युंजय सिंह, दिनेश, शिव प्रकाश उर्फ प्रकाश, राजेंद्र यादव, संग्राम सिंह और दुर्ग विजय शामिल हैं।








