नेपाल में फंसे राजस्थान के 60 तीर्थयात्री, 15 दिन तक रास्ता बंद रहने की आशंका
धादिंग (नेपाल)। नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के कारण सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से राजस्थान के कोटा और बारां से आए करीब 60 तीर्थयात्री मुश्किल में फंस गए हैं। काठमांडू से करीब 65 किलोमीटर दूर कृष्णभीर में सड़क कट जाने के कारण यात्रियों की बस आगे नहीं जा पा रही है और वापस लौटना भी आसान नहीं है।
यात्रियों के मुताबिक उनके पास मौजूद राशन भी अब खत्म होने की स्थिति में है। रात गुजारने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिल रही है। स्थानीय स्तर पर उन्हें सड़क पर भी रुकने नहीं दिया जा रहा, ऐसे में बस ही उनके लिए रात गुजारने का एकमात्र सहारा बनी हुई है। समूह में बुजुर्गों के साथ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। खुले में या सड़क किनारे रात बिताने की स्थिति को लेकर यात्रियों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
प्रशासन ने जताई 15 दिन लगने की आशंका
स्थानीय पुलिस-प्रशासन से जानकारी लेने पर यात्रियों को बताया गया कि पुल और रास्ता दोबारा तैयार होने में कम से कम 15 दिन लग सकते हैं। प्रशासन 15 दिन से पहले रास्ता खुलने को मुश्किल बता रहा है। ऐसे में यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे इतने लंबे समय तक बस में रहकर कैसे गुजारा करेंगे।
यात्री बद्रीलाल मीणा ने बताया कि बस में महिलाएं, बच्चियां और छोटे बच्चे हैं। ऐसी स्थिति में 15 दिन गुजारना बेहद मुश्किल है। वहीं हनुमान सिंह का कहना है कि पुल जल्द बनने की उम्मीद भी नहीं दिखाई दे रही है और प्रशासन भी कम से कम 15 दिन का समय बता रहा है।
लंबी तीर्थयात्रा पर निकला था समूह
यह समूह 29 अगस्त को नेपाल में प्रवेश करने से पहले लंबी तीर्थयात्रा पर निकला था। यात्रियों ने बागेश्वर धाम, चित्रकूट, अयोध्या, काशी विश्वनाथ और गोरखनाथ के दर्शन किए। इसके बाद सोनौली के रास्ते नेपाल पहुंचे और पशुपतिनाथ के दर्शन किए।
नेपाल से लौटते समय उनका कार्यक्रम बिहार, झारखंड, कामाख्या, ओडिशा और गंगासागर होते हुए वापस लौटने का था। लेकिन कृष्णभीर में रास्ता कट जाने के बाद पूरी यात्रा अचानक अनिश्चितता में फंस गई है।
छोटी गाड़ियों से लौटने का सुझाव, लेकिन खर्च बड़ी समस्या
यात्रियों का कहना है कि उन्हें बस छोड़कर छोटी गाड़ियों के जरिए काठमांडू से हटने की बात कही जा रही है। लेकिन समूह में करीब 60 लोग हैं। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों को ले जाने के लिए कई छोटी गाड़ियों की जरूरत होगी और उसका खर्च उठाना भी आसान नहीं है।
नाथूलाल मीणा ने बताया कि अगर किसी तरह सोनौली तक पहुंच भी गए तो वहां से आगे कैसे जाएंगे, यह भी स्पष्ट नहीं है। यात्रियों का कहना है कि अगर बस यहीं छोड़नी पड़ी तो सामान का क्या होगा और उनकी तीर्थयात्रा कैसे पूरी होगी, इसका कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा है।
फिलहाल धादिंग में गुजरी मार्ग पर खड़ी बस ही इस समूह का अस्थायी ठिकाना बनी हुई है। बस के भीतर बुजुर्ग और बच्चे बैठे हैं, जबकि बाहर सड़क टूटी हुई है और रास्ता बंद है। यात्री बार-बार रास्ता खुलने की जानकारी ले रहे हैं और इस चिंता में हैं कि अगर 15 दिन तक रास्ता नहीं खुला तो आगे क्या होगा।








