नेपाल में जल प्रलय के बाद तबाही का मंजर: अपनों को खो चुके लोगों के सामने अब भुखमरी का संकट, भूख से बिलबिला रहे बच्चे
नुवाकोट/नेपाल। नेपाल के चार जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ और जल प्रलय के बाद हालात लगातार भयावह बने हुए हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों की तबाही के निशान जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे लोगों का दर्द और गहराता जा रहा है। अपनों को खो चुके हजारों लोग अब उनकी तलाश में भटक रहे हैं, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में भोजन और जरूरी सुविधाओं के अभाव ने लोगों के सामने भुखमरी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। सबसे ज्यादा चिंता भूख से परेशान बच्चों को लेकर है।
बताया जा रहा है कि रसुवा से शुरू हुई तबाही नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों तक तेजी से फैल गई। इस विनाशकारी आपदा की चपेट में आने के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवार के सदस्यों से बिछड़ गए हैं। करीब 15 हजार लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो पाने की बात सामने आ रही है, जिससे लापता लोगों को लेकर परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
दलदली जमीन और रेत के विशाल ढेरों के बीच लोग अपने अपनों की तलाश में जान जोखिम में डालकर आगे बढ़ रहे हैं। कई ऐसे दुर्गम इलाके हैं, जहां सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो चुका है और वहां केवल हवाई मार्ग से ही पहुंचना संभव है।
करीब 3 लाख से अधिक आबादी वाले नुवाकोट जिले के अधिकांश हिस्सों में आपदा के बाद कोहराम मचा हुआ है। दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। भूख से परेशान बच्चों की स्थिति ने राहतकर्मियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
नुवाकोट के विदुर नगर पालिका स्थित ढूंगे बाजार में चारों ओर तबाही के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय व्यापारी नवीन और पूर्ण बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसी भयावह स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी। उनका कहना है कि उनके कई अपने अब तक लापता हैं और उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है।
पड़ोस की गांव पालिका के अध्यक्ष ध्रुव श्रेष्ठ के नेतृत्व में करीब 200 लोगों की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। टीम में शामिल बलराम गिरी और श्याम दंगोल का कहना है कि आपदा ने पूरे इलाके को बुरी तरह तबाह कर दिया है। जमीन इतनी दलदली हो चुकी है कि कहीं भी कदम रखने पर धंसने का खतरा बना रहता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बच्चों और परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था करना है। लोग दलदली जमीन और रेत से ढके घरों के भीतर बची जरूरी वस्तुओं को निकालने के लिए भी जान जोखिम में डाल रहे हैं। सोमवार को कई स्थानों पर लोगों को मानव श्रृंखला बनाकर राहत और सामान निकालने का काम करते देखा गया।
नेपाल सरकार ने आपदा से निपटने के लिए कई स्तरों पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं। जहां सड़क मार्ग से पहुंचना संभव है, वहां राहत सामग्री भेजी जा रही है, जबकि दुर्गम क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर के जरिए भोजन और जरूरी सहायता पहुंचाई जा रही है।
त्रिशूली स्थित राहत केंद्र से आधा दर्जन से अधिक हेलीकॉप्टरों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। सोमवार को पूरे दिन त्रिशूली, रसुवा और धादिंग के दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टरों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान जारी रहा।
नेपाल में आई इस भीषण आपदा ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। अपनों को खोने का दर्द झेल रहे लोगों के सामने अब जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन तबाही के निशान और लोगों की पीड़ा लगातार सामने आ रही है।अगर चाहें तो मैं इसका और भी ज्यादा आकर्षक, वायरल पोर्टल स्टाइल हेडलाइन भी बना सकता हूँ।








