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लखनऊ में 500 छात्रों से 80 लाख फीस लेने के बाद कोचिंग बंद, रात में भेजा मैसेज और सुबह लटका मिला ताला

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लखनऊ में 500 छात्रों से 80 लाख फीस लेने के बाद कोचिंग बंद, रात में भेजा मैसेज और सुबह लटका मिला ताला

लखनऊ। कपूरथला स्थित गैलेक्सी क्लासेज के अचानक बंद होने से करीब 500 छात्र-छात्राओं में हड़कंप मच गया। आरोप है कि कोचिंग प्रबंधन ने विद्यार्थियों से करीब 80 लाख रुपये फीस लेने के बाद रात में व्हाट्सएप ग्रुप पर संस्थान बंद करने का संदेश भेजा। सोमवार सुबह जब विद्यार्थी कोचिंग सेंटर पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला और प्रबंधन से जुड़े लोगों के मोबाइल फोन बंद मिले।

बताया जा रहा है कि रविवार को भी कोचिंग सेंटर में सामान्य दिनों की तरह विशेष कक्षाएं संचालित हुई थीं। देर रात करीब 12 बजे विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप में अचानक संदेश भेजा गया कि कोचिंग बंद की जा रही है और फीस वापस कर दी जाएगी। सुबह सेंटर पहुंचने पर विद्यार्थियों को ताला लगा मिला, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रतियोगी परीक्षाओं की कराई जाती थी तैयारी

कपूरथला और अलीगंज क्षेत्र में संचालित गैलेक्सी क्लासेज में SSC, बैंकिंग, TET और पुलिस भर्ती जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी। विद्यार्थियों के मुताबिक अलग-अलग पाठ्यक्रम के लिए उनसे करीब 8 हजार से 16 हजार रुपये तक फीस ली गई थी।

छात्रों ने लगाया समय और पैसे बर्बाद होने का आरोप

टीईटी की तैयारी कर रहीं जालौन निवासी साक्षी त्रिपाठी ने एक वर्ष की पढ़ाई के लिए 10 हजार रुपये जमा किए थे। उनका कहना है कि रात में अचानक कोचिंग बंद होने का संदेश मिला, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई।

वाराणसी की उन्नति वर्मा ने SSC की तैयारी के लिए 12 हजार रुपये जमा किए थे। उनके मुताबिक बंदी की जानकारी तो दी गई, लेकिन कोचिंग बंद करने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।

बाराबंकी निवासी राम लखन ने कहा कि उन्हें फीस से ज्यादा चिंता अपने परिवार को जवाब देने की है। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है और परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। उनकी मां खेती के सहारे उनकी पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं।

वहीं सुल्तानपुर निवासी अंकित मौर्य ने आरोप लगाया कि फीस के साथ उनका कीमती समय भी बर्बाद हुआ है।

शिक्षकों ने भी प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

कोचिंग के शिक्षक अमित राज तिवारी, सुशील प्रजापति और संजय गुप्ता के मुताबिक वर्ष 2024 से संस्थान की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी। शुरुआत में वेतन 10-15 दिन की देरी से मिलने लगा और बाद में एक-दो महीने तक वेतन अटकने लगा। शिक्षकों का आरोप है कि धीरे-धीरे उनका करीब आठ महीने का वेतन बकाया हो गया।

शिक्षकों के मुताबिक जब उन्होंने बिना फीस के विद्यार्थियों को पढ़ाने से इनकार किया तो प्रबंधन की ओर से दो नए शिक्षकों को रख लिया गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले में शिक्षकों की ओर से उरई निवासी निदेशक अजय सिंह समेत मनोज तिवारी, योगेश यादव, निशांत सिंह, मृत्युंजय मिश्रा, अवनीश वर्मा और प्रशांत सिंह के खिलाफ तहरीर दी गई है।

एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्रा के अनुसार संचालक समेत प्रबंधन से जुड़े सभी लोगों को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। छात्रों की फीस वापसी और कोचिंग प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।

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