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आजमगढ़ से विदा हुए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने भावुक होकर दी विदाई

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एक अधिकारी की विदाई… और आँखों में ठहरे आँसू

आजमगढ़। सरकारी सेवा में अधिकारियों का स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। विदाई समारोह होते हैं, शुभकामनाएँ दी जाती हैं और अधिकारी नई जिम्मेदारी संभालने के लिए रवाना हो जाते हैं। लेकिन कुछ विदाइयाँ ऐसी होती हैं, जिनमें औपचारिकताओं से अधिक भावनाएँ दिखाई देती हैं।

आजमगढ़ के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गंभीर सिंह की विदाई का दृश्य भी कुछ ऐसा ही रहा। उनसे मिलने पहुंचे अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में कई लोग भावुक नजर आए। किसी ने हाथ मिलाकर विदाई दी तो किसी के पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। बस एक ही बात सुनाई देती रही—“सर, आपकी कमी महसूस होगी।”

अधिवक्ताओं की आँखें हुईं नम

गंभीर सिंह के कार्यकाल के दौरान राजस्व न्यायालय में अनेक मामलों की सुनवाई हुई। विदाई के दौरान उनसे मिलने पहुंचे अधिवक्ताओं की भावनाएँ यह बताती रहीं कि उनके साथ बना संवाद और व्यवहार लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहा।

किसी अधिकारी की अदालत में अपने मामले को लेकर बहस करने वाले अधिवक्ता जब उसी अधिकारी की विदाई के समय भावुक दिखाई दें, तो यह केवल प्रशासनिक पद से जुड़ी बात नहीं होती, बल्कि व्यक्तिगत व्यवहार की भी झलक देती है।

स्टाफ के लिए केवल ‘साहब’ नहीं रहे गंभीर सिंह

सरकारी कार्यालयों में अधिकारी बदलते रहते हैं, लेकिन हर अधिकारी अपने पीछे ऐसी भावनात्मक छाप नहीं छोड़ता। गंभीर सिंह के साथ काम करने वाले कर्मचारियों के बीच भी उनकी विदाई को लेकर भावुकता देखने को मिली।

कर्मचारियों के बीच से निकली एक बात ने माहौल को और भावुक कर दिया—

“सर, यहाँ बहुत अच्छे-अच्छे अधिकारी आएँगे, लेकिन शायद आपके जैसा अच्छा इंसान दोबारा न आए।” यह वाक्य उनके कार्यकाल के दौरान बने मानवीय संबंधों को बयां करता नजर आया।

पद की जिम्मेदारी के साथ सहज व्यवहार

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व का पद प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। राजस्व मामलों, वसूली, न्यायालयीन कार्य, जनसुनवाई और विभागीय समन्वय जैसे विषयों पर लगातार निर्णय लेने पड़ते हैं।

गंभीर सिंह के कार्यकाल के दौरान उनके कार्यालय में आने वाले अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और आम लोगों के साथ संवाद उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। यही सहजता उनकी विदाई के दौरान लोगों की भावनाओं में भी दिखाई दी।

आम लोगों की समस्याओं को सुनने की रही कोशिश

प्रशासनिक व्यवस्था में किसी अधिकारी की भूमिका केवल फाइलों और आदेशों तक सीमित नहीं होती। आम नागरिक अपनी समस्याएँ लेकर अधिकारियों के कार्यालय पहुंचते हैं। गंभीर सिंह के कार्यकाल में भी लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर उनसे मुलाकात की और अपनी बात रखी।

यही वजह रही कि उनके जाने के समय लोगों के बीच केवल एक अधिकारी के स्थानांतरण की चर्चा नहीं थी, बल्कि उनके व्यवहार और संवाद को लेकर भी बातें होती रहीं।

कुर्सी पर नया अधिकारी आएगा, यादें रहेंगी

सरकारी सेवा में स्थानांतरण व्यवस्था का हिस्सा है। गंभीर सिंह अब आजमगढ़ से नई जिम्मेदारी की ओर रवाना हो रहे हैं। उनके स्थान पर कोई नया अधिकारी जिम्मेदारी संभालेगा और प्रशासनिक कामकाज आगे बढ़ेगा।

लेकिन उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और उनसे मिलने वाले लोगों के लिए यह विदाई कुछ समय तक यादों में बनी रहेगी।

अधिकारी आते हैं, जाते हैं। पद और जिम्मेदारियाँ बदलती रहती हैं। लेकिन व्यवहार और संबंधों की यादें लंबे समय तक लोगों के बीच बनी रहती हैं।

गंभीर सिंह की विदाई के दौरान नम हुई आँखें शायद इसी बात की गवाही दे रही थीं कि उनके कार्यकाल की एक प्रशासनिक पारी समाप्त हुई है, लेकिन उनसे जुड़े मानवीय रिश्तों की स्मृतियाँ अभी बाकी हैं।

क्योंकि किसी अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं कि उसने अपना पद कितनी अच्छी तरह निभाया, बल्कि यह भी है कि उसके जाने के बाद लोग उसे किस भाव से याद करते हैं।

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