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भारत के हरियाली वाले क्षेत्र में 5 प्रतिशत से अधिक की आई कमी, गर्मियों के तापमान पर बढ़ा असर !

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भारत के हरियाली वाले क्षेत्र में 5 प्रतिशत से अधिक की आई कमी, गर्मियों के तापमान पर बढ़ा असर

नई दिल्ली। भारत में हरियाली वाले क्षेत्रों में लगातार कमी आ रही है, जबकि बिना हरियाली वाले भू-भाग का विस्तार बढ़ा है। जलवायु अनुसंधान संगठन क्लाइमेट ट्रेंड्स के अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2001 से 2025 के बीच भारत में ग्रीन कवर यानी हरियाली वाले क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, गैर-हरित क्षेत्र में 5.6 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। अध्ययन में इस बदलाव को गर्मियों के औसत तापमान में बढ़ोतरी से भी जोड़ा गया है।

25 वर्षों में हरित क्षेत्र 36.95 से घटकर 31.35 प्रतिशत

भारत में हरियाली वाला क्षेत्र वर्ष 2001 में लगभग 36.95 प्रतिशत था, जो 2025 में घटकर 31.35 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में बिना हरियाली वाली जमीन का हिस्सा 63.05 प्रतिशत से बढ़कर 68.65 प्रतिशत हो गयाअध्ययन में दोनों तरह के क्षेत्रों के बीच गर्मियों के औसत तापमान में लगभग 1 से 2.5 डिग्री सेल्सियस का अंतर सामने आने की बात कही गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़-पौधे जमीन की सतह के तापमान को नियंत्रित करने, छाया देने और नमी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पेड़-पौधे जलवायु संतुलन के लिए जरूरी

क्लाइमेट ट्रेंड्स के अध्ययन में कहा गया है कि हरियाली केवल पर्यावरण की सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के जलवायु-अनुकूलन ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पेड़-पौधे स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने के साथ-साथ वातावरण में नमी बनाए रखने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं रिपोर्ट में अध्ययनकर्ता डॉ. पलक बलियान के हवाले से बताया गया है कि हरित और गैर-हरित क्षेत्रों के बीच तापमान का अंतर पेड़-पौधों की उपयोगिता को स्पष्ट करता है। अध्ययन के अनुसार, वनस्पति वाले क्षेत्रों का संरक्षण और विस्तार बढ़ते तापमान की चुनौती से निपटने में सहायक हो सकता है।

राजस्थान के 14 जिलों में सूखे का खतरा

राजस्थान में सूखे की आशंका के बीच राज्य आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इनमें जोधपुर, जालोर, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, डूंगरपुर और फलोदी समेत अन्य क्षेत्र शामिल बताए गए हैं रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के चार जिलों को भी अकालग्रस्त घोषित किया गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के हवाले से राज्य में औसत वर्षा 89 प्रतिशत होने का उल्लेख किया गया है, जबकि कम वर्षा वाले कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बताई गई है।

हरियाली बढ़ाने पर जोर

विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़-पौधों का संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक वनस्पति वाले क्षेत्रों का विस्तार बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण को सुरक्षित रखना जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।

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