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संघर्ष से सम्मान तक: गायत्री देवी ने बदली अपनी तकदीर

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रामगढ़। पतरातू प्रखंड के देववरिया गांव की रहने वाली गायत्री देवी की कहानी संघर्ष, साहस और बदलाव की मिसाल बनकर सामने आई है। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली गायत्री देवी का जीवन लंबे समय तक आर्थिक तंगी और सामाजिक उपेक्षा के बीच बीता। पति की मजदूरी से होने वाली सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल था, जिससे बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य एक सपना बनकर रह गया था।

परिस्थितियां इतनी विपरीत हो गई थीं कि गायत्री देवी को मजबूरी में हड़िया-दारू बेचने का काम शुरू करना पड़ा। इससे भले ही कुछ आमदनी हो जाती थी, लेकिन इसके साथ उन्हें सामाजिक तिरस्कार और आत्मसम्मान को ठेस भी झेलनी पड़ती थी। नशे में धुत लोगों का अभद्र व्यवहार और समाज की नजरों में गिरती छवि उनके लिए मानसिक रूप से बेहद पीड़ादायक थी।

गायत्री देवी के जीवन में बदलाव का निर्णायक मोड़ 7 दिसंबर 2017 को आया, जब उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के तहत गठित ‘सखी शिव महिला समूह’ की सदस्यता ली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बैठकों में भाग लेना शुरू किया और छोटी-छोटी बचत के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया।

समूह की महिलाओं के साथ संवाद और सहयोग से गायत्री देवी को न केवल आर्थिक सहारा मिला, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी लौट आया। उन्हें सम्मानजनक आजीविका के नए विकल्पों की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी। आज गायत्री देवी न केवल आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं, बल्कि समाज में अपनी पहचान भी मजबूत कर रही हैं।

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Pelli Poola Jada
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