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पूर्व एआरटीओ के घर विजिलेंस का बड़ा छापा: 22 किलो सोना-चांदी, ₹1.62 करोड़ नकद और ₹35 करोड़ से अधिक की संपत्ति का खुलासा

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लखनऊ, नोएडा, रायबरेली और बाराबंकी में 15 अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले, आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई से मचा हड़कंप

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विजिलेंस की टीम ने आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामले में पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास पर बड़ी छापेमारी करते हुए भारी मात्रा में सोना-चांदी, करोड़ों रुपये की नकदी और अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में अब तक करीब 35 करोड़ रुपये से अधिक की चल और अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है।

विजिलेंस की यह कार्रवाई मंगलवार को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित चंद्रलोक कॉलोनी में स्थित आवास पर शुरू हुई, जो बुधवार दोपहर तक लगातार जारी रही। छापेमारी के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।

दीवारों और गुप्त खानों में छिपा रखा था सोना-चांदी

तलाशी के दौरान विजिलेंस टीम को घर की दीवारों, अलमारियों और विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से भारी मात्रा में कीमती सामान मिला। अधिकारियों ने वहां से 13 किलोग्राम सोना और 9 किलोग्राम चांदी बरामद की। इसमें सोने-चांदी के आभूषण, सोने के बिस्कुट और अन्य कीमती वस्तुएं शामिल हैं।

बरामद सोना-चांदी का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं का इस तरह छिपाकर रखा जाना बेहद चौंकाने वाला है।

बेड बॉक्स और अलमारी से मिले ₹1.62 करोड़ नकद

छापेमारी के दौरान विजिलेंस टीम को 1 करोड़ 62 लाख रुपये नकद भी मिले। यह रकम बेड बॉक्स, अलमारी के ऊपर रखे पैकेटों तथा अन्य गुप्त स्थानों में छिपाकर रखी गई थी। अधिकारियों ने पूरी नकदी को कब्जे में लेकर उसकी गिनती और दस्तावेजीकरण किया।

चार जिलों में 15 करोड़ की अचल संपत्तियों का खुलासा

जांच के दौरान लखनऊ, नोएडा, रायबरेली और बाराबंकी में स्थित 15 अचल संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद हुए। इन संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 15 करोड़ रुपये आंका गया है। विजिलेंस अब इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।

दो साल से चल रही थी जांच

जानकारी के अनुसार, ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में करीब दो वर्ष पहले एंटी करप्शन संगठन द्वारा जांच शुरू की गई थी। उस समय वह परिवहन विभाग में कार्यरत थे। बाद में पदोन्नति के बाद वे एआरटीओ बने और पिछले वर्ष 2025 में सेवानिवृत्त हो गए।

करीब तीन महीने पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंप दी थी, जिसके बाद साक्ष्य जुटाने के बाद मंगलवार को छापेमारी की गई।

जांच अभी जारी, बढ़ सकती है कार्रवाई

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार बरामद दस्तावेजों, नकदी, आभूषणों और अन्य संपत्तियों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के दौरान बैंक खातों, निवेश, संपत्तियों की खरीद और आय के स्रोतों का भी मिलान किया जाएगा। यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं तो संपत्तियों का मूल्य और बढ़ सकता है तथा मामले में आगे कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

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