रिश्तेदारों के खातों के जरिए छिपाया जाता था पैसों का स्रोत, पुलिस ने नकदी, कार और सोने के आभूषण किए बरामद।
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि चोरी की गई रकम का इस्तेमाल केवल खर्च करने में ही नहीं, बल्कि शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए भी किया जाता था। आरोप है कि रकम का स्रोत छिपाने के लिए पैसे पहले रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते थे, फिर वहां से आगे भेजे जाते थे।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में गिरफ्तार आरोपित अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे ने कई अहम जानकारियां दी हैं। जांच के दौरान करीब 30 रिश्तेदारों और परिचितों के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन के साक्ष्य मिलने पर संबंधित बैंकों के माध्यम से उन खातों को फ्रीज करा दिया गया है।
रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर एक स्विफ्ट डिजायर कार, एक लाख रुपये से अधिक की नकदी, सोने की चेन और टॉप्स बरामद किए। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये सामान चोरी की रकम से खरीदे गए थे।
पुलिस टीम आरोपितों को रुदौली स्थित लवकुश मिश्रा के घर भी लेकर गई, जहां से करीब 40 से 50 हजार रुपये नकद और उसकी पत्नी के पास से सोने के आभूषण बरामद किए गए। वहीं अनुकल्प मिश्रा की निशानदेही पर 50 से 60 हजार रुपये नकद, सोने की चेन और एक कार बरामद हुई। करुणेश पांडे के कमरे से भी लगभग 10 से 20 हजार रुपये नकद मिले।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया कि अनुकल्प मिश्रा कथित रूप से अविनाश शुक्ला के साथ मिलकर चोरी की रकम का कुछ हिस्सा शेयर मार्केट में निवेश करता था। इस संबंध में कुछ दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
मामले में अनुकल्प मिश्रा के पिता रविंद्र मिश्रा, चाचा रामेंद्र मिश्रा और एक सर्राफा कारोबारी विजय कौशल से भी पुलिस पूछताछ कर रही है। आरोप है कि चोरी की रकम से खरीदे गए आभूषणों को गलाने में भी सहयोग किया गया। बताया जा रहा है कि संबंधित सर्राफा कारोबारी की दुकान पिछले दो-तीन दिनों से बंद है।
क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि न्यायालय से मिली रिमांड अवधि पूरी होने के बाद तीनों आरोपितों को दोबारा जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले के आर्थिक पहलुओं और धन के लेनदेन की गहन जांच कर रही है।








