अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-द्रोन हमले का दावा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। होर्मूज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, रडार स्टेशन और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। साथ ही अमेरिका ने ईरान को वैश्विक बाजार में कच्चा तेल बेचने की अनुमति देने वाले कुछ लाइसेंस भी निरस्त कर दिए हैं।
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस को निशाना बनाया गया, साथ ही एक अमेरिकी ड्रोन भी मार गिराया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम युद्धविराम समाप्त हो चुका है और आगे की कार्रवाई के लिए अमेरिका तैयार है। हालांकि उन्होंने बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म होने से भी इनकार किया।
दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मूज जलडमरूमध्य में अस्थिरता बढ़ने से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है।








