फूलपुर शबाना मोड़ पर खतरे की घंटी! घरेलू बिजली सप्लाई का पोल झुका, ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की लाइन, नगर पंचायत की लीकेज पाइपलाइन पर भी उठे सवाल
फूलपुर नगर के शबाना मोड़ से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां सड़क किनारे लगा घरेलू बिजली सप्लाई का पोल एक तरफ झुक गया है और उसके नीचे की मिट्टी लगातार कट रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पोल के पास नगर पंचायत की पानी की सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज है, जिससे बहता पानी मिट्टी को काट रहा है और वहां गड्ढा बन गया है। यही वजह है कि पोल और कमजोर होता दिखाई दे रहा है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन इस क्षेत्र के ऊपर से गुजर रही है, जबकि झुका हुआ पोल घरों और दुकानों तक बिजली सप्लाई पहुंचाने वाला पोल है। फिलहाल पोल तारों के सहारे संतुलित नजर आ रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो यह किसी भी समय गिर सकता है।
इस मार्ग के दोनों ओर रिहायशी मकान, दुकानें और लगातार चलने वाला यातायात है। बच्चे, बुजुर्ग और आम नागरिक इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में यह स्थिति किसी बड़े हादसे की चेतावनी मानी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने बिजली विभाग के कर्मचारियों को सूचना दी है। विभाग की ओर से आश्वासन भी मिला कि फोटो और वीडियो अधिकारियों तक भेज दिए गए हैं और जल्द कार्रवाई होगी।
हालांकि, नगर के लोगों का यह भी कहना है कि अधिशासी अभियंता देवेंद्र सिंह के कार्यकाल में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हुआ है। उनकी देखरेख में 11 हजार वोल्ट की लाइन को व्यवस्थित तरीके से बस स्टैंड तक ले जाने का कार्य भी चल रहा है और बिजली विभाग की कई समस्याओं का समाधान हुआ है। लेकिन लोगों का मानना है कि ऐसी छोटी चूक पर समय रहते ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।
अब सवाल केवल बिजली विभाग तक सीमित नहीं है। जिस पाइपलाइन के लीकेज से मिट्टी कट रही है, वह नगर पंचायत के अधीन बताई जा रही है। इसलिए स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत अध्यक्ष,अधिशासी अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से भी मांग की है कि पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि पोल की नींव और कमजोर न हो।
नगरवासियों ने बिजली विभाग के जेई महोदय से भी निवेदन किया है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए झुके हुए पोल का शीघ्र निवारण कराया जाए। लोगों का कहना है कि जनहित में समय रहते कार्रवाई सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि हादसे के बाद अफसोस करने से बेहतर है कि पहले ही खतरे को टाल दिया जाए।
फिलहाल, सभी की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी है कि यह खतरे की घंटी कब तक सुनाई देती रहेगी और कब इसका स्थायी समाधान होगा।








