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बदलते जमुई की तस्वीर: रक्षाबंधन पर पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं ने जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बांधा रक्षा-सूत्र , जताया अटूट विश्वास।

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बदलते जमुई की तस्वीर: रक्षाबंधन पर पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं ने जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बांधा रक्षा-सूत्र , जताया अटूट विश्वास।

जमुई से मोहम्मद आसिफ अनवर

जमुई: समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में रक्षाबंधन पर्व के पावन अवसर पर जिले के अत्यंत सुदूरवर्ती और पूर्व के अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों—गुरमाहा, चोरमारा और मुसहरीटांड—के मुख्य धारा में लौटे परिवारों की महिलाओं ने जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक सहित जिला प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर अटूट विश्वास और आत्मीयता का संदेश दिया।

इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, ‘जिले के सुदूरवर्ती एवं पूर्व अति-नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं का स्वयं समाहरणालय आकर प्रशासन पर विश्वास प्रकट करना हमारी अच्छी नियत और सतत प्रयासों की सफलता का परिणाम है। हमारे लिए भी यह अत्यंत भावुक क्षण है। हमारी निरंतर कोशिश रहेगी कि प्रशासन और वहां की जनता के बीच कायम यह भावनात्मक जुड़ाव सदैव अटूट रहे।’

उन्होंने आगे कहा, “इन क्षेत्रों के निवासियों के साथ बिहार विधानसभा में चुनाव से ही निरंतर सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। क्षेत्र में जिन भी मूलभूत नागरिक सुविधाओं का अभाव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर त्वरित गति से पूरा किया जाएगा। स्थानीय जनसमुदाय का यह अपार स्नेह और विश्वास, केंद्र व राज्य सरकार की विकासपरक नीतियों तथा जनता और प्रशासन के मध्य सुदृढ़ होती विश्वास बहाली का प्रत्यक्ष प्रमाण है।”

इस महत्वपूर्ण अवसर पर इन सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार के सदस्यों का नक्सली गतिविधियों से बाहर निकलने और मुख्य धारा में लौटने के पश्चात उनके जीवन में अभूतपूर्व और सकारात्मक बदलाव आया है। एक समय था जब नक्सली गतिविधियों के साये में ग्रामीण पुलिस को देखते ही डरकर छुप जाया करते थे, लेकिन आज वे हर महत्वपूर्ण अवसर पर जिला प्रशासन के कार्यक्रम में शामिल होकर खुशी मनाते हैं। आगे महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि ‘जिस प्रकार परिवार में भाई बहनों सहित पूरे परिवार के रक्षा का दायित्व निभाते हैं, ठीक उसी प्रकार जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक उनके दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा और निरंतर विकास सुनिश्चित कर रहे हैं। आज हमारे बच्चें नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं, गांव में आशा कार्यकर्ताओं का चयन हो चुका है, तथा एम्बुलेंस, चिकित्सकों की सेवाएं, घर-घर राशन वितरण एवं नल से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुचारू रूप से संचालित हो रही है।’

गुरमाहा, चोरमारा एवं मुसहरीटांड जैसे पूर्व के अति नक्सल प्रभावित और सुदूरवर्ती क्षेत्रों की महिलाओं का बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के स्वतः जिला मुख्यालय पहुँचकर प्रशासनिक पदाधिकारियों को रक्षा-सूत्र बाँधना केवल एक सामान्य घटना नहीं है। वर्षों तक नक्सलवाद के साए में विकास की मुख्यधारा से कटे इन दुर्गम इलाकों में यह बदलाव सरकार की संवेदनशीलता, समर्पित विकास नीतियों और जिला प्रशासन के धरातलीय प्रयासों की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। साथ ही यह शासन , जिला प्रशासन और आम जनता के बीच प्रगाढ़ होते अटूट विश्वास, भयमुक्त वातावरण के निर्माण और सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों तक पहुँच रहे विकास के कारण सकारात्मक बदलावों की एक जीवंत और सशक्त अभिव्यक्ति है।

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