सात वर्षीय रागिनी की पुकार पर पहुंची डीएम की मदद, अब सरकार कराएगी इलाज
बलिया। एक पैर से चलने में असमर्थ और स्कूल जाने के लिए रोज़ाना करीब 400 मीटर की दूरी घिसटकर तय करने वाली सात वर्षीय मासूम रागिनी की मदद के लिए जिला प्रशासन आगे आया है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बच्ची की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उसके गांव पहुंचकर न सिर्फ उसका हाल जाना, बल्कि इलाज की पूरी व्यवस्था कराने का भरोसा भी दिलाया।
विकासखंड मनियर अंतर्गत ग्राम पंचायत रानीपुर निवासी देवेंद्र राजभर की बेटी रागिनी गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा है। स्कूल घर से करीब 400 मीटर दूर है, लेकिन एक पैर से चलने में असमर्थ रागिनी को स्कूल पहुंचने के लिए जमीन पर घिसटकर जाना पड़ता था।
बताया गया कि स्कूल आते-जाते समय रागिनी कई बार थककर जमीन पर बैठ जाती थी। बीते 31 अगस्त को रागिनी ने बलिया के डीएम मंगला प्रसाद सिंह से भावुक अपील करते हुए कहा था कि उसका एक पैर खराब है और वह खूब पढ़ना चाहती है।
डीएम खुद पहुंचे रागिनी के गांव
बच्ची की अपील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। इसके बाद बुधवार को जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह रागिनी के गांव पहुंचे और उसे ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई। साथ ही जरूरत के अन्य सामान भी दिए गए।
डीएम से ट्राइसाइकिल मिलने के बाद रागिनी ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब उसे और कुछ नहीं चाहिए।
एक साल पहले पेड़ से गिरी थी रागिनी
रागिनी ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले वह पेड़ से गिर गई थी, जिसके बाद उसके पैर में गंभीर चोट लग गई। पैर की हड्डी घुटने से ठीक तरह जुड़ नहीं सकी। समय बीतने के साथ मांसपेशियां कमजोर हो गईं और पैर का पंजा भी झुक गया।
बीएचयू में होगा विशेष इलाज
जिला प्रशासन ने रागिनी का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद बेहतर उपचार और विशेष जांच के लिए उसे बीएचयू अस्पताल भेजने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय के आधार पर बच्ची का ऑपरेशन और समुचित इलाज कराया जाएगा। इलाज पर आने वाला पूरा खर्च प्रदेश सरकार वहन करेगी।
डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने रागिनी के गांव पहुंचकर उसके पिता और परिवार से भी बातचीत की तथा भरोसा दिलाया कि बच्ची के इलाज में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।
रागिनी के पिता देवेंद्र राजभर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद रागिनी पढ़ाई के प्रति बेहद उत्साहित है और एक पैर के सहारे भी अपने बेहतर भविष्य का सपना देख रही है। अब प्रशासन और सरकार की मदद से उसके इलाज की उम्मीद जगी है।








