नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, हर दिन जान का रिस्क
कटिहार से रतन कुमार की रिपोर्ट

कटिहार में बाढ़ के पानी ने बच्चों की पढ़ाई का रास्ता भी मुश्किल कर दिया है। बरारी प्रखंड के प्रतापगढ़ बांध किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रतापगढ़ तक पहुंचाने के लिए अब बच्चों का एकमात्र सहारा नाव है। बरण्डी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बाद स्कूल चारों तरफ से पानी से घिर गया है। सड़क और आने जाने के रास्ते पूरी तरह जलमग्न है। ऐसे में रोजाना बच्चे नाव पर सवार होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर है। गंगा कोसी और बरांडी नदी के जलस्तर में लगातार बदलाव के कारण कटिहार के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रतापगंज स्कूल के छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली पर रही है। स्कूल जाने और लौट के लिए उन्हें नदी का पानी पार करना पड़ता है। विद्यालय के शिक्षक अब्दुल बारी कहते हैं की बाढ़ का पानी फैलने के बाद नाव ही आने-जाने का एकमात्र साधन बचा है।

सरकारी स्तर पर अब तक नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्कूल प्रबंधन ने अपने खर्चे पर निजी नाविक की व्यवस्था की है। इसके लिए रोजाना ₹500 दिए जा रहे हैं। इस नाव से हर दिन 100 से ज्यादा बच्चे नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं। नाविक नावेद अली के मुताबिक वह अपनी निजी नाव से बच्चों को स्कूल पहुंचाने और वापस लाने का काम करते हैं। रोजाना करीब 150 से 200 बच्चे नाव से नदी पार करते हैं। पानी के बीच बच्चों को ले जाने में डर तो लगता है लेकिन वह पूरी सावधानी से उन्हें स्कूल पहुंचाने और वापस लाने की कोशिश करते हैं। बच्चों के अभिभावकों की चिंता भी कम नहीं है। उनका कहना है कि बच्चे रोज नाव पर बैठकर स्कूल जाते हैं और हाथ से का डर बना रहता है।

हाल ही में एक बच्चे की डूबने से मौत के बाद डर और बढ़ गया है। अभिभावकों की मांग है कि यहां जल्द पुल का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए हर दिन जान जोखिम में डालकर नाव का सहारा ना लेना पड़े।







