बिना जांच बने दिव्यांग प्रमाणपत्र, दिल्ली तक फैला फर्जीवाड़े का नेटवर्क
सिद्धार्थनगर। बिना किसी जांच के दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए जाने और उन पर सीएमओ के डिजिटल हस्ताक्षर किए जाने का मामला सामने आया है। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हुई।दिल्ली पुलिस की जांच में सिद्धार्थनगर से जारी चार दिव्यांग प्रमाणपत्र सामने आए। जांच के दौरान वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद देवरिया से जारी पांच प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में आ गए।जांच आगे बढ़ी तो बरेली के आठ और बदायूं के चार प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए जाने की जानकारी सामने आई। दिल्ली पुलिस के हाथ लगे कुल 16 प्रमाणपत्रों में उत्तर प्रदेश के पते दर्ज थे, जबकि सभी के आधार पर दिल्ली का पता दर्ज होने की बात सामने आई है।मामले की जांच दिल्ली के मौरिस नगर थाने में दर्ज धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम से जुड़े मुकदमे के तहत की जा रही है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम जांच के लिए सिद्धार्थनगर पहुंची और वहां से जारी चार दिव्यांग प्रमाणपत्रों की पड़ताल की।बताया गया है कि इनमें एक प्रमाणपत्र जून और तीन प्रमाणपत्र जुलाई में जारी किए गए थे। प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी सामने आने के बाद वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला को गिरफ्तार किया गया है।अब जांच का दायरा मेडिकल बोर्ड और ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने वाली व्यवस्था तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए कितने प्रमाणपत्र तैयार किए गए और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।साथ ही, तत्कालीन सीएमओ और दिव्यांगता की जांच करने वाले मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी प्रमाणपत्रों के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।








