आजमगढ़: मंदिरों से घंटे चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 20 पीतल के घंटे और एक लाख रुपये बरामद; 17 साल से फरार ₹25 हजार का इनामी भी गिरफ्तार

आजमगढ़, 15 अक्टूबर 2026। जनपद आजमगढ़ में दो महत्वपूर्ण मामलों के सफल अनावरण और लंबे समय से फरार चल रहे एक वांछित अभियुक्त की गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने गुरुवार को पुलिस कार्यालय में संबंधित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पहली कार्रवाई में मेहनगर क्षेत्र स्थित पौहारी बाबा मंदिर से चोरी किए गए 20 पीतल के घंटे, चोरी के माल की बिक्री से प्राप्त एक लाख रुपये नकद और घटना में इस्तेमाल किए गए दो चार पहिया वाहन बरामद किए गए। इस मामले में मेहनगर और तरवां पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की थी।

वहीं, दूसरे मामले में वर्ष 2009 में दर्ज मुकदमों और वर्ष 2010 में गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में वांछित मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, अभियुक्त वर्ष 2010 से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पौहारी बाबा मंदिर से दो बार चोरी हुए थे पीतल के घंटे
पुलिस के मुताबिक, थाना मेहनगर क्षेत्र के पौहारी बाबा मंदिर में चोरी की पहली घटना 29 सितंबर 2026 की रात हुई थी। इस दौरान अज्ञात चोर मंदिर से 11 पीतल के घंटे चोरी कर ले गए थे। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 की रात चोरों ने फिर उसी मंदिर को निशाना बनाया और नौ पीतल के घंटे चोरी कर लिए।

इस तरह दोनों घटनाओं में मंदिर से कुल 20 पीतल के घंटे चोरी हुए। मामले में थाना मेहनगर पर मुकदमा अपराध संख्या 340/2026, धारा 305(डी) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए जांच शुरू की।

विवेचना के दौरान पुलिस को चोरी किए गए घंटों को बेचने की योजना और चोरी का माल खरीदने वाले व्यक्ति के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पूछताछ में गाजीपुर जनपद के सैदपुर थाना क्षेत्र में एक मंदिर से चार पीतल के घंटे चोरी किए जाने की घटना की जानकारी भी सामने आई। पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार, यह घटना 7 अगस्त 2026 की है, जिसके संबंध में थाना सैदपुर में मुकदमा अपराध संख्या 281/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज होना सत्यापित हुआ।

विशुनपुरा मोड़ के पास पुलिस ने की घेराबंदी
मंदिर चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत 3 और 4 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि थाना मेहनगर और थाना तरवां की संयुक्त पुलिस टीम संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि खरिहानी-चिरैयाकोट मार्ग पर विशुनपुरा मोड़ के पास दो चार पहिया वाहनों में चोरी के पीतल के घंटे रखे हैं और कुछ लोग एक वाहन से दूसरे वाहन में चोरी का सामान स्थानांतरित कर रहे हैं।

सूचना मिलते ही थाना मेहनगर प्रभारी अभिराज कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ चौकी प्रभारी सिंहपुर उपनिरीक्षक अक्षय प्रताप सिंह और थाना तरवां के चौकी प्रभारी रासेपुर उपनिरीक्षक रूपेश कुमार सिंह भी पुलिस टीम के साथ पहुंचे। पुलिस ने मौके पर दोनों वाहनों की घेराबंदी की।
पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस टीम को देखकर आरोपियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर चोरी के 20 पीतल के घंटे, चोरी के माल की बिक्री से प्राप्त एक लाख रुपये नकद तथा घटना में इस्तेमाल किए गए दो चार पहिया वाहन बरामद किए गए इस कार्रवाई को मंदिर चोरी की दोनों घटनाओं के खुलासे की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया गया है।
वर्ष 2009 के दो मामलों में वांछित था मोनू मिश्रा
दूसरे मामले में थाना तरवां क्षेत्र के ग्राम तरवां सरैया निवासी मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा का नाम वर्ष 2009 में दर्ज दो मुकदमों में सामने आया था। पुलिस के अनुसार, 16 मार्च 2009 को एक व्यक्ति ने अपनी पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के संबंध में शिकायत दी थी। इस शिकायत के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 160/2009, धारा 363 और 366 भारतीय दंड संहिता (भादवि) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इसके बाद 30 मार्च 2009 को शिकायतकर्ता की दूसरी पुत्री को भी भगाकर ले जाने के संबंध में एक अन्य मुकदमा अपराध संख्या 216/2009 दर्ज किया गया। इसमें धारा 363, 366, 120बी और 376 भादवि के तहत अभियोग पंजीकृत हुआ था। पुलिस विज्ञप्ति में बताया गया है कि इन मामलों में मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा पुत्र स्वर्गीय श्याम नारायण मिश्रा उर्फ सामू मिश्रा का नाम प्रकाश में आया था।
इसके अतिरिक्त, अभियुक्त के विरुद्ध वर्ष 2010 में मुकदमा अपराध संख्या 225/2010 के तहत उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) में भी मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस के अनुसार, अभियुक्त वर्ष 2010 से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ की ओर से 27 नवंबर 2022 को 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
नवरसिया पुलिया के पास से हुई गिरफ्तारी
पुलिस विज्ञप्ति के मुताबिक, 23 सितंबर 2026 को थाना तरवां पुलिस टीम संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग और वांछित तथा वारंटी अभियुक्तों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा को ग्राम डुभाव स्थित नवरसिया पुलिया के पास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी का समय सुबह करीब पांच बजे बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, अभियुक्त के कब्जे से .315 बोर का एक देशी तमंचा और एक जिंदा कारतूस भी बरामद किया गया। इस गिरफ्तारी को लंबे समय से लंबित मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई बताया गया है।
10 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
दोनों मामलों के सफल अनावरण और वांछित अभियुक्त की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को 15 अक्टूबर 2026 को पुलिस कार्यालय आजमगढ़ में सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने सभी को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की।
सम्मानित होने वाले पुलिसकर्मियों में शामिल हैं—
1. उपनिरीक्षक राजीव कुमार सिंह, थाना प्रभारी तरवां
2. वरिष्ठ उपनिरीक्षक कृष्णा मिश्रा
3. उपनिरीक्षक अक्षय प्रताप सिंह
4. उपनिरीक्षक सूरज तिवारी
5. उपनिरीक्षक अतुल मिश्रा
6. आरक्षी विपिन यादव
7. आरक्षी रतनेश
8. आरक्षी आशुतोष
9. आरक्षी शहबाज
10. आरक्षी कमलेश कुमार यादव
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पुलिस का कहना है कि अपराधों के खुलासे, वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।







