बज़्म गुलशन-ए-अदब की मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित, शायरों ने तरही मिसरे पर पेश किया कलाम
फूलपुर, आजमगढ़। शनिवार 24 अक्टूबर 2026 को बज़्म गुलशन-ए-अदब की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन जेडएफएम फाउंडेशन कार्यालय, फूलपुर तहसील मोड़ पर किया गया। गोष्ठी में शायरों ने फिराक गोरखपुरी के तरही मिसरे “कहाँ से चूक हुई तेरे जानिसारों से” पर अपने खूबसूरत अशआर पेश किए और श्रोताओं से खूब दाद व प्रशंसा हासिल की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मैकश अंजुमी साहब ने की, जबकि बर्क गोरखपुरी और मोहम्मद सुहैल साहब विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन रफीक फूलपुरी ने किया और तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक की सआदत साकिब जमाल साहब को हासिल हुई।
शायरों के चुनिंदा अशआर
तुम्हारी याद के आँसू हैं जुगनुओं की तरह,
सजी हुई शब-ए-गम मेरी सितारों से।
मैकश अंजुमी
सदा से आपस में सब बरसर-ए-पैकार तो हैं,
हुआ है मसला हल कोई और कारज़ारों से।
डॉ. शफीक आजमी
ज़माने भर ने हमारा कमाल देखा है,
सफीने हमने गुज़ारे हैं रेगज़ारों से।
मुख्तार आलम आजमी
चमन के फूल बगावत पर उतर आए हैं,
पनाह माँग रही है ख़िज़ाँ बहारों से।
तस्कीन आजमी
हम अपने शीशे को तकिया बना के सोते हैं,
हमारे जिस्म का रिश्ता है कोहसारों से।
डॉ. मोहम्मद अनवर इस्लाही
लगा के बाप कलेजे से चाँद-तारों को,
गुज़र रहा है मशक्कत की रेगज़ारों से।
डॉ. रिजवान मुहज्ज़बी
जो फूल ख़ार की मानिंद चुभते रहते हैं,
किए हुए हैं वही दोस्ती बहारों से।
रफीक फूलपुरी
इक इंकलाब उठा है तेरे इशारों से,
सुलग रहा है जहाँ आग से शरारों से।
राफतुल्लाह बर्क गोरखपुरी
वो हिज्र क्या है जो बीनाई भी न छीन सके,
वो इश्क़ क्या है जो गुज़रा न हो शरारों से।
सैयद तहज़ीब आबिद
वो कैसे पार लगाएँगे अपनी कश्ती को,
जो डर रहे हैं समंदर की तेज़ धारों से।
अनीस अशरफ
गुलों ने ज़ख्मी बदन कर दिया मेरा सारा,
रहा बचाने में मसरूफ खुद को ख़ारों से।
अस्लम अली आजमी
बस एक लम्हे में सब छिन गया है ऐ मालिक,
कहाँ से चूक हुई तेरे जानिसारों से।
समर नाज़रीन
अमीर-ए-शहर का शायद ये हुक्म है साकिब,
जो लग गए हैं सभी दफअतन कतारों से।
साकिब जमाल
तनी है आज इसी पर रिदाए गुमनामी
कभी जो शहर था मशहूर शहरयारों से
सुहेल अखतर सिकरोरी
गोष्ठी का सिलसिला हमेशा की तरह देर रात तक जारी रहा। इस दौरान श्रोताओं ने शायरों के कलाम का आनंद लिया और अपनी पसंद के अशआर पर दाद देकर उनका उत्साहवर्धन किया।
अंत में बज़्म गुलशन-ए-अदब के सदस्यों ने सभी शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। इस तरह यह साहित्यिक महफिल उर्दू शायरी, साहित्यिक रुचि और आपसी अदबी संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ संपन्न हुई।








