जमुई के घोरिकवा में सरफ़राज़ अंसारी ने अपने खर्च पर बनवाया पुल, सिस्टम की लाचारी पर उठे सवाल!
जमुई :- मो आसिफ अनवर
जमुई जिले के झाझा प्रखंड से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने एक तरफ इंसानियत की नई मिसाल पेश की है, तो दूसरी तरफ सूबे की विकास व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान भी खड़ा कर दिया है।
झाझा प्रखंड के घोरिकवा गाँव में लंबे समय से एक पुल की मांग की जा रही थी। लेकिन जब व्यवस्था ने आँखें मूँद लीं, तो जनता के दर्द को समझते हुए आगे आए जनाब सरफ़राज़ अंसारी साहब।
सरफ़राज़ अंसारी ने अपने निजी फंड से पुल का निर्माण करवाकर घोरिकवा और आसपास के इलाके के लोगों को एक बड़ी मुसीबत से निजात दिलाई है। इस पुल के बनने से ग्रामीणों के लिए आवागमन अब बेहद आसान हो गया है, जिसके लिए स्थानीय लोग उनका दिल से आभार व्यक्त कर रहे हैं।
इस खास मौके पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह अमौर विधायक अख्तरुल ईमान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ विधायक जनाब गुलाम सरवर साहब, विधायक सरवर आलम साहब, इंजीनियर आफताब साहब, AIMIM प्रवक्ता आदिल हसन साहब, राणा रंजीत सिंह, समाजसेवी Z अली भुट्टो,समाजसेवी परवेज सेठ अंसारी,शाहनवाज मलिक समेत पार्टी के कई सम्मानित कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
जहाँ एक ओर सरफ़राज़ अंसारी साहब के इस जनहितकारी कदम की पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है… वहीं दूसरी तरफ जनता के बीच एक बड़ा सवाल तैर रहा है—”जो काम सरकार और प्रशासन को करना चाहिए था, वो काम एक आम नागरिक को अपने पैसे से क्यों करना पड़ा?”
क्या ग्रामीण इलाकों के विकास के दावे सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
जनता की भलाई के लिए ऐसे निजी प्रयास यकीनन काबिले-तारीफ हैं, लेकिन यह घटना शासन-प्रशासन के लिए एक कड़ा सबक है कि उन्हें धरातल पर उतरकर अपनी ज़िम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना होगा।








