निर्भया कांड की तरह फिर दहली दिल्ली! चलती बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, ड्राइवर-कंडक्टर गिरफ्तार
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चलती बस में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना ने वर्ष 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। पुलिस ने मामले में बस चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता परिवार सहित मैनपुरी जिले के एक गांव की रहने वाली है और स्थानीय सरकारी इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा है। बताया जा रहा है कि तीन अगस्त को मां द्वारा पढ़ाई नहीं करने पर डांटने के बाद वह नाराज होकर घर से निकल गई थी।
पीड़िता अपने ताऊ के घर जाने के लिए बस से रवाना हुई, लेकिन रात के समय बारिश और अंधेरा होने के कारण वह गलती से परी चौक पर उतर गई। इसी दौरान उसे एक बस दिखाई दी। बस के कंडक्टर ने उसे नोएडा सेक्टर-63 जाने की बात कही, जिसके बाद छात्रा बस में सवार हो गई।
आरोप है कि कुछ देर बाद बस में मौजूद चालक और कंडक्टर ने उसके साथ अश्लील हरकत की और सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद दोनों आरोपी उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र स्थित रिंग रोड पर उतारकर फरार हो गए।
47 किलोमीटर दौड़ी बस, कहीं नहीं हुई जांच
घटना का एक गंभीर पहलू यह भी सामने आया है कि करीब 47 किलोमीटर का सफर तय करने के दौरान बस को किसी पुलिसकर्मी ने जांच के लिए नहीं रोका। बताया जा रहा है कि बस सूरजपुर से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक पहुंची और इस दौरान कोई प्रभावी जांच नहीं हुई। इस मामले ने दिल्ली में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की चेकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए बस चालक और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान कानपुर देहात निवासी ड्राइवर और कानपुर नगर निवासी कंडक्टर के रूप में बताई गई है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई स्लीपर बस को भी जब्त कर लिया है।
घटना के बाद परिवार ने छोड़ा गांव
मामले के बाद पीड़िता का परिवार गांव छोड़कर चला गया। ग्रामीणों के अनुसार, घर पर ताला लटका हुआ है और परिवार इस घटना के बाद किसी से बात करने के लिए तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि परिवार रक्षा बंधन मनाने गांव आया था और अगले दिन घर पर ताला लगाकर वापस लौट गया।
यह घटना एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और पुलिस जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।








