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सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के मामलों में नहीं घसीटना चाहिए, CJI सूर्यकांत !

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सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के मामलों में नहीं घसीटना चाहिए, CJI सूर्यकांत

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की सुप्रीम कोर्ट से मुलाकात की मांग के बीच प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के मामलों में नहीं घसीटना चाहिए। अदालतों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए और किसी भी पेशेवर के काम में बाधा नहीं डालनी चाहिए जागरण ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने यह टिप्पणी उस समय की, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले को लेकर चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश से मिलने और उन्हें ज्ञापन सौंपने का आग्रह किया था।

अदालतों को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए: CJI

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालतें केवल फैसला सुना सकती हैं। किसी पेशेवर के काम में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर लोकतांत्रिक संस्था को शांति से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। अदालतों को राजनीतिक मामलों में इस तरह शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी संस्थागत भूमिका कमजोर हो CJI ने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की कि वे विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों पर कानून के मुताबिक शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसा मंच नहीं बनाया जाना चाहिए, जहां होने वाली घटनाएं उसकी संस्थागत भूमिका को कमजोर कर सकें।

वकीलों के काम में बाधा और प्रदर्शन को लेकर जताई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। इस दौरान वरिष्ठ वकील आत्माराम नाडकर्णी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने भी संबंधित मामले का उल्लेख किया प्रदीप राय ने कहा कि वकील अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं और राजनीतिक दलों को उनके कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वहीं, वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने वकीलों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रदर्शनकारियों पर हमला कर रहे थे, जबकि पुलिस प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर रही थी।

इस पर कोर्ट ने वकीलों और नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें सुरक्षा के बिना नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने याचिका पर सुनवाई का भरोसा दिया।

कांग्रेस ने CJI से मिलने और ज्ञापन सौंपने का किया था आग्रह

मामले की पृष्ठभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का मुद्दा शामिल था। कांग्रेस ने प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने का आग्रह किया था पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों, छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी तथा धरनों को रद्द किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए थे। हालांकि, CJI ने कांग्रेस नेताओं के मिलने और ज्ञापन सौंपने के आग्रह को स्वीकार नहीं किया उन्होंने कहा कि उठाए गए मुद्दे अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं। ऐसे में लंबित मामलों पर चर्चा करना न्यायिक शुचिता के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पत्र में उठाए गए मुद्दों से निपटने की प्रशासनिक शक्ति सुप्रीम कोर्ट के पास नहीं है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संस्थाओं की स्वतंत्रता पर जोर

CJI सूर्यकांत की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन का अधिकार कानून के दायरे में रहकर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। विरोध के लिए निर्धारित स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा सकता है, लेकिन किसी भी संस्था के कामकाज में बाधा उत्पन्न करना उचित नहीं है प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का काम कानून के अनुसार मामलों की सुनवाई करना और फैसले देना है। राजनीतिक विवादों को अदालतों में इस तरह नहीं लाया जाना चाहिए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और संस्थागत गरिमा प्रभावित हो।

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