भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्ष का असंतोष कहा जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर शुक्रवार को अहम फैसला सुनाते हुए इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष के दावों को स्वीकार करते हुए परिसर में पूजा-पाठ का अधिकार देने का आदेश दिया, जबकि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए वैकल्पिक भूमि मांगने की छूट दी गई है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन आवेदन पर सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप मूल रूप से मां वाग्देवी सरस्वती के मंदिर का है और यहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी समाप्त नहीं हुई।
कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल प्राचीन काल में संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। अदालत ने परिसर के संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी पहले की तरह एएसआई के पास ही बनाए रखने का आदेश दिया है।हाईकोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। फैसले के बाद अब परिसर में नमाज पर रोक लग गई है। वहीं, स्थानीय हिंदुओं को नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने का पूर्ण अधिकार दिया गया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि तीर्थयात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा देवता की पवित्रता और मूल स्वरूप की रक्षा करना संवैधानिक दायित्व है।
कोर्ट ने लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने और उसे भोजशाला में पुनर्स्थापित करने की मांग पर भी केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी को धार जिले में मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन आवंटन हेतु सरकार के समक्ष आवेदन देने की छूट दी है।
फैसले के बाद एहतियात के तौर पर धार जिले में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी गई है और प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व……
मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर अब ऐतिहासिक न्यायिक फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अपने फैसले में माना है कि भोजशाला का मूल स्वरूप माता सरस्वती (वाग्देवी) के मंदिर और संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में था। अदालत के इस निर्णय के बाद भोजशाला एक बार फिर देशभर में चर्चा का केंद्र बन गई है।
इतिहासकारों के अनुसार भोजशाला का निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार वंश के प्रतापी राजा भोज ने वर्ष 1034 ईस्वी में कराया था। इसे उस समय ‘सरस्वती कंठाभरण’ के नाम से जाना जाता था। यह केवल एक मंदिर ही नहीं, बल्कि संस्कृत, दर्शन, संगीत, आयुर्वेद और खगोल विज्ञान की शिक्षा का प्रमुख केंद्र भी था, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी अध्ययन के लिए पहुंचते थे। परिसर में स्थापित माता वाग्देवी की प्रतिमा को परमारकालीन शिल्पकला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है।
इतिहास में दर्ज घटनाओं के अनुसार वर्ष 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान इस परिसर को भारी क्षति पहुंची। बाद में दिलावर खान गौरी ने मंदिर के अवशेषों और खंभों का उपयोग कर इसे मस्जिद का स्वरूप दिया, जिसे कमाल मौला मस्जिद कहा गया। वर्ष 1514 में महमूद शाह खिलजी द्वितीय ने परिसर के बाहरी हिस्से में सूफी संत कमाल मौलाना का मकबरा भी बनवाया।
ब्रिटिश काल में वर्ष 1902 में कैप्टन सी.ई. लुआर्ड और पुरातत्व विभाग ने भोजशाला का सर्वेक्षण किया था। अपनी पुस्तक ‘धार एंड मांडू’ में उन्होंने इसे मूल रूप से हिंदू मंदिर बताया था। इसी दौरान तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन माता वाग्देवी की ऐतिहासिक प्रतिमा को इंग्लैंड ले गए, जो वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में सुरक्षित बताई जाती है।
आजादी के बाद वर्ष 1951 से 1958 के बीच भोजशाला परिसर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में सौंप दिया गया। वर्ष 2003 में जारी अंतरिम व्यवस्था के तहत हिंदुओं को मंगलवार और वसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी गई, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की व्यवस्था दी गई।
मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2024 में एएसआई ने 98 दिनों तक वैज्ञानिक और जीपीआर सर्वे किया। एएसआई ने 2100 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट अदालत में पेश की। इसके आधार पर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अपने फैसले में माना कि भोजशाला परिसर का मूल स्वरूप हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र का था।









