सूर्या चौहान हत्याकांड और असद एनकाउंटर पर सियासत तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल, भाजपा सरकार पर निशाना
गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में 17 वर्षीय सूर्या चौहान की हत्या के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। बकरीद के दिन हुई इस वारदात में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि मुख्य आरोपी बताए जा रहे असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। सरकार इस कार्रवाई को अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि जब मामला पुरानी रंजिश और आपसी विवाद से जुड़ा था, तो पूरी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले एनकाउंटर की नौबत क्यों आई।
विपक्षी दलों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की घटनाओं को राजनीतिक संदेश के तौर पर पेश किया जा रहा है और 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर माहौल बनाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि किसी भी आरोपी को अदालत में पेश कर कानून के तहत सजा दिलाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, जबकि भाजपा सरकार अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए कार्रवाई को उचित ठहरा रही है। ऐसे में सूर्या चौहान हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति और पुलिस कार्यप्रणाली पर बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।








