नेपाल पर दो झीलों का खतरा, जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चिंता,579 लोगों की मौत, 320 भारतीयों से संपर्क नहीं; राहत-बचाव अभियान जारी
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अब नेपाल के सामने दो झीलों से नया खतरा पैदा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से एक झील का पानी ओवरफ्लो होने लगा है, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है।
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जब तक दोनों झीलों का पानी पूरी तरह कम नहीं हो जाता, तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा। शुक्रवार को पहली झील से पानी बाहर निकलना शुरू हो गया, लेकिन ऊपर की ओर दूसरी झील भी दिखाई दी है। अधिकारियों को आशंका है कि दूसरी झील में पानी का दबाव बढ़ने पर निचले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आ सकती है।
ग्लेशियर टूटने के बाद बिगड़े हालात
बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, मिट्टी और मलबा नदी तंत्र में आ गया था। इसके बाद बाढ़ की लहरों ने आसपास के इलाकों को प्रभावित किया। घटना के बाद चीन और नेपाल की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नेपाल में इस आपदा में 579 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि करीब 320 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। वहीं, नेपाली अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
तिब्बत में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में फंसे करीब 400 भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित किया गया। इनमें से 153 भारतीयों को सड़क मार्ग से सुरक्षित नेपाल पहुंचाया गया है। भारत सरकार द्वारा प्रभावित नागरिकों को वापस लाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं।
इसके अलावा करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी प्रभावित क्षेत्र में मौजूद बताए गए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुछ यात्री भी शामिल हैं। आपदा के बाद काठमांडू पहुंचे तमिलनाडु के 21 यात्रियों को शुक्रवार को दिल्ली लाया गया।
नेपाल ने विदेशी मदद लेने से किया इनकार
नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी मदद लेने से इनकार करते हुए अपने संसाधनों के जरिए राहत और बचाव अभियान जारी रखने की बात कही है। हालांकि, चीन की ओर से भी बचाव अभियान चलाया गया है और नेपाल की आपदा प्रभावित सीमा क्षेत्र में आपात सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की गई है।
नेपाल के अधिकारियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
करीब 90 हजार लोग प्रभावित
रेडक्रॉस के अनुसार बाढ़ और इससे जुड़ी आपदा से करीब 90 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए जमीनी और हवाई अभियान जारी है। राहत एवं बचाव कार्य में हजारों सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बचाव अभियान में बड़ी संख्या में नेपाली सुरक्षाकर्मी और अन्य एजेंसियां जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों झीलों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि खतरा बढ़ने की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता दोनों झीलों में बढ़ता जलस्तर है। अगर पानी का दबाव और बढ़ता है तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है








