आजमगढ़ शंभूपुर हत्याकांड में अनाथ हुईं दो मासूम बहनों की जिम्मेदारी उठाएगी पुलिस, SSP देंगे एक माह का वेतन
आजमगढ़। शंभूपुर गांव में हुए ट्रिपल हत्याकांड के बाद अपने माता-पिता को खो चुकीं दो मासूम बहनों के लिए आजमगढ़ पुलिस ने मानवीय पहल की है। 10 वर्षीय परी और 8 माह की मासूम बच्ची की देखभाल, शिक्षा और भविष्य को लेकर पुलिस परिवार ने जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों को गोद लेने की घोषणा करते हुए अपना एक माह का वेतन देने की बात कही है।
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के साथ एएसपी चिराग जैन भी बच्चियों के साथ मौजूद रहे। सामने आई तस्वीर में एसएसपी एक हाथ में 8 माह की बच्ची को गोद में लिए और दूसरे हाथ से 10 वर्षीय परी के सिर पर हाथ रखे नजर आ रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बच्चियों को भरोसा दिलाया कि उनके पालन-पोषण और शिक्षा में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
करीब सात घंटे चला था घटनाक्रम
शंभूपुर में तीन लोगों की हत्या के बाद आरोपी अरविंद सिंह अपने तीन बच्चों को लेकर लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ कमरे में बंद हो गया था। पुलिस और परिजन करीब सात घंटे तक उससे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की अपील करते रहे। इसी दौरान कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह और आरक्षी प्रदीप ने जोखिम उठाकर कमरे का दरवाजा तोड़ा। अंदर 9 वर्षीय शौर्य घायल अवस्था में मिला, जिसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। वहीं दोनों बच्चियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
परी के बयान और जांच में सामने आई जानकारी
पुलिस के अनुसार, रेस्क्यू की गई 10 वर्षीय परी ने बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंट्री वुंड पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉर्चिंग के निशान मिले हैं। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, गोली की दिशा और .32 बोर रिवाल्वर से संबंधित जांच को भी विवेचना में शामिल किया गया है।पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध जांच और पोस्टमार्टम निष्कर्षों के अनुसार शौर्य की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई।
पुलिसकर्मी देंगे एक-एक दिन का वेतन
दोनों बच्चियों के भविष्य को देखते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की है। वहीं जनपद के पुलिसकर्मी भी एक-एक दिन का वेतन बच्चियों के सहयोग के लिए देंगे।पूरे घटनाक्रम के दौरान एडीजी वाराणसी जोन नवीन अरोड़ा और डीआईजी आजमगढ़ सुनील कुमार सिंह मौके पर मौजूद रहे और पुलिस टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे।शंभूपुर की इस घटना के बाद दो मासूम बच्चियों के सामने आए इस कठिन दौर में आजमगढ़ पुलिस की ओर से की गई पहल को मानवीय सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।








