क्या शिक्षा की आवाज़ पर चलेगा डंडा? जंतर-मंतर आंदोलन ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं को पुलिस बल प्रयोग कर रोकने की कोशिश की गई।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, जब आंदोलनकारी संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। आरोप है कि कई प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया।
सोनम वांगचुक को हटाए जाने पर भी उठे सवाल
आंदोलन के दौरान अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य जांच के नाम पर सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा हटाए जाने के आरोपों ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। आंदोलनकारियों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया है।
इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों पर सवाल उठाने वाले युवाओं के साथ संवाद किया जाना चाहिए, न कि बल प्रयोग।
विपक्षी नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों ने जताया समर्थन
इस आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों और कई सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। शबाना आज़मी, प्रकाश राज सहित कई हस्तियों ने आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। वहीं, आम आदमी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और इकरा हसन तथा आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है।
युवाओं के सवालों पर अब सरकार से जवाब की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि आज देश का युवा अपने शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन सवालों का जवाब बातचीत और समाधान के जरिए दिया जाएगा या फिर प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाया जाएगा।
विपक्ष और आंदोलन से जुड़े लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पूरे विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग की है। वहीं, सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन ने अब लोकतांत्रिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवाओं की आवाज जैसे व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार आंदोलनकारियों से संवाद का रास्ता अपनाती है या यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है।








